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'क्या लिखूँ?'

 

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी द्वारा रचित निबंध 'क्या लिखूँ?' के अभ्यास खंड 'मेरे उत्तर मेरे तर्क' (पृष्ठ संख्या 35-36) के हल नीचे दिए गए हैं:

प्रथम दिवस 

बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर और तर्क

1. "हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है... असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।" निबंध में 'हैट' और 'खूँटी' का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है?

  • सही उत्तर: (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना।
  • तर्क: लेखक ए.जी. गार्डिनर के हवाले से स्पष्ट करना चाहते हैं कि निबंध के लिए 'विषय' (खूँटी) सिर्फ एक आधार है, जबकि असली महत्व लेखक के उन 'मनोभावों' (हैट) का है जिन्हें वह व्यक्त करना चाहता है। यदि मन में उमंग है, तो विषय कोई भी हो, प्रभावी लेखन संभव है।

2. "उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है... उसका उल्लास रहता है।" मानटेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है?

  • सही उत्तर: (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना।
  • तर्क: मानटेन ने निबंधों को 'मन की स्वच्छंद रचना' माना है। लेखक ने इसी पद्धति को चुना क्योंकि उनके पास न तो विद्वानों जैसी सामग्री थी और न ही पुस्तकालय जाने का समय। उन्होंने अपनी सच्ची अनुभूति और व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर लिखने का निर्णय लिया।

3. "तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल... वृद्धों के लिए अतीत सुखद..." यह तुलना किस पर आधारित है?

  • सही उत्तर: (घ) अभिलाषा और अनुभव।
  • तर्क: तरुण भविष्य की 'अभिलाषा' (सपनों) में जीते हैं क्योंकि वे जीवन-संग्राम से दूर हैं, जबकि वृद्ध अपने 'अनुभवों' और सुखद स्मृतियों (अतीत) में खुशी ढूँढ़ते हैं। दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं क्योंकि एक को परिवर्तन की चाह है और दूसरे को परंपरा के संरक्षण की।

4. निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?

  • सही उत्तर: (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए।
  • तर्क: लेखक को नमिता और अमिता के लिए दो अलग विषयों ('दूर के ढोल सुहावने' और 'समाज-सुधार') पर लिखना था। खुसरो ने जिस तरह एक ही पद्य में चार अलग फरमाइशों (खीर, चरखा, कुत्ता, ढोल) को पिरो दिया, उसी पद्धति से लेखक ने भी एक ही निबंध में दोनों विषयों को मिलाने की योजना बनाई।

5. निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है?

  • सही उत्तर: (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
  • तर्क: लेखक के अनुसार, मनुष्य जाति के इतिहास में ऐसा कोई काल नहीं रहा जब सुधारों की जरूरत न पड़ी हो। जैसे-जैसे नए दोष उत्पन्न होते हैं, वैसे-वैसे नए सुधार होते हैं। जो आज सुधार है, वह कल दोष बन सकता है, इसीलिए यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है।

मेरी समझ मेरे विचार (प्रश्नोत्तर)

1. निबंध लेखन के विषय में ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?

  • गार्डिनर के विचार: गार्डिनर का मानना है कि लिखने के लिए एक विशेष मानसिक स्थिति या 'उमंग' की आवश्यकता होती है। जब मन में आवेग हो, तो विषय कोई भी हो (खूँटी की तरह), लेखक अपने भाव व्यक्त कर सकता है। उनके लिए विषय गौण और मनोभाव प्रधान हैं।
  • लेखक के विचार: इसके विपरीत लेखक कहते हैं कि उन्हें ऐसी किसी मानसिक स्थिति का अनुभव नहीं होता जहाँ भाव अपने आप उमड़ें। उन्हें लिखने के लिए बहुत सोचना, चिंता करना और परिश्रम करना पड़ता है। उनके लिए विषय पर सामग्री जुटाना और रूपरेखा बनाना एक कठिन चुनौती है।

2. लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?

  • तरुणों की असंतुष्टि: युवा वर्ग भविष्य के सपने देखता है और वर्तमान की कमियों को दूर कर 'क्रांति' लाना चाहता है। वे वर्तमान की धीमी गति और पुरानी परंपराओं से असंतुष्ट रहते हैं क्योंकि वे जल्दी बदलाव चाहते हैं।
  • वृद्धों की असंतुष्टि: बुजुर्ग अपने सुखद अतीत (बीते समय) की स्मृतियों में जीते हैं। उन्हें वर्तमान की भागदौड़ और बदलती हुई मर्यादाएँ अच्छी नहीं लगतीं। वे पुरानी परंपराओं के 'संरक्षक' होते हैं और वर्तमान को अपने अतीत जैसा देखना चाहते हैं।

3. नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं?

  • विषय: नमिता 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' पर और अमिता 'समाज-सुधार' पर आदर्श निबंध लिखवाना चाहती हैं।
  • कठिनाइयाँ: * लेखक को लगा कि 'दूर के ढोल सुहावने' जैसे सीमित विषय पर पाँच पेज लिखना मुश्किल है।
    • 'समाज-सुधार' इतना व्यापक विषय है जिस पर विद्वानों के भी अलग मत हैं, उसे संक्षेप में समेटना कठिन था।
    • लेखक के पास उस समय न तो कोई पुस्तकालय था, न विश्वकोश और न ही पर्याप्त समय। उन्हें अपनी याददाश्त और अनुभव के भरोसे ही लिखना था।

4. निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?

  • आचार्यों की युक्तियाँ: * निबंध छोटा और सुगठित होना चाहिए।
    • इसके दो मुख्य अंग होने चाहिए— सामग्री (तथ्य) और शैली (लिखने का ढंग)।
    • लिखने से पहले विषय की एक स्पष्ट 'रूपरेखा' तैयार कर लेनी चाहिए।
    • भाषा प्रवाहमयी हो और वाक्य छोटे पर एक-दूसरे से जुड़े हों।
  • व्यक्तिगत तैयारी (सुझाव): निबंध लिखने से पहले हम आमतौर पर विषय को समझते हैं, मुख्य बिंदुओं की सूची (Outline) बनाते हैं, उससे संबंधित कोटेशन या उदाहरण ढूँढ़ते हैं और फिर प्रस्तावना से शुरुआत करते हैं।

5. मानटेन ने "जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।" निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?

  • उपयोगिता: देखने, सुनने और अनुभव करने से लेखन में 'मौलिकता' और 'सच्चाई' आती है। जब लेखक अपने अनुभव लिखता है, तो वह किताबी ज्ञान के बजाय अपनी 'सच्ची अनुभूति' व्यक्त करता है। इससे पाठक लेखक से जुड़ाव महसूस करते हैं और निबंध अधिक जीवंत, आत्मीय और प्रभावशाली बन जाता है। इसे ही 'स्वच्छंद निबंध' शैली कहा जाता है। 

'विधा से संवाद' (पृष्ठ संख्या 36-37) का हल और संबंधित जानकारी नीचे दी गई है:

विधा से संवाद: मुख्य बिंदु

इस खंड में 'निबंध' विधा की परिभाषा और उसकी रचना प्रक्रिया को समझाया गया है।

  • निबंध का अर्थ: 'निबंध' शब्द का शाब्दिक अर्थ है— 'बाँधना' (नि+बंध)। अर्थात ऐसी गद्य रचना जो विचारों और भावों से भली-भाँति बँधी या गठी हुई हो।
  • परिभाषा: यह वह विधा है जिसमें लेखक किसी विषय पर अपने अनुभव, दृष्टिकोण और भावनाओं को तार्किक और क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करता है।

दूसरा दिन 

निबंध लेखन का आरेख (Flowchart) और प्रक्रिया

पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 37 पर एक आरेख दिया गया है, जो निबंध लेखन के चरणों को दर्शाता है। इसके आधार पर निबंध लेखन की प्रक्रिया इस प्रकार है:

  1. प्रेरणा: मन में उठने वाला भाव या लिखने की इच्छा।
  2. विषय चयन: जिस पर निबंध लिखना है (जैसे: समाज-सुधार)।
  3. सामग्री संग्रह: विषय से संबंधित तथ्यों और विचारों को इकट्ठा करना।
  4. रूपरेखा निर्माण: निबंध के मुख्य बिंदुओं का ढांचा तैयार करना।
  5. शैली निर्धारण: लिखने का ढंग (जैसे: सरल, गंभीर या व्यंग्यात्मक)।
  6. भाव-विस्तार: बिंदुओं को विस्तार से लिखना।
  7. लेखन और समापन: निबंध को अंतिम रूप देना और निष्कर्ष लिखना।

अभ्यास कार्य: आरेख के आधार पर निबंध लेखन

यदि आपको 'समाज-सुधार' या 'दूर के ढोल सुहावने' पर निबंध लिखना हो, तो आप इस आरेख का पालन इस प्रकार करेंगे:

उदाहरण: 'समाज-सुधार'

  • सामग्री संग्रह: पुराने सुधारकों (बुद्ध, गांधी) के कार्य।
  • रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. सुधार की आवश्यकता क्यों? 3. वर्तमान समस्याएँ, 4. समाधान, 5. उपसंहार।
  • शैली: विचारात्मक और गंभीर।

भाव-विस्तार (पृष्ठ संख्या 37)

पाठ में दिए गए महत्वपूर्ण वाक्यों का भाव-विस्तार नीचे दिया गया है:

1. "जो तरुण संसार के जीवन-संग्राम से दूर हैं, उन्हें संसार का चित्र बड़ा ही मनमोहक प्रतीत होता है।"

विस्तार: इसका अर्थ है कि जब तक युवा वास्तविक दुनिया की कठिनाइयों, संघर्षों और जिम्मेदारियों का सामना नहीं करते, उन्हें दुनिया केवल सुखद और रंगीन लगती है। दूर से देखने पर जीवन की कठोरता का अहसास नहीं होता।

2. "मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।"

विस्तार: समाज कभी भी पूर्ण रूप से दोषमुक्त नहीं होता। समय के साथ पुरानी परंपराएँ दोष बन जाती हैं और नई समस्याओं के जन्म लेने पर उन्हें सुधारने की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। यह एक शाश्वत प्रक्रिया है।

3. "आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।"

विस्तार: समय परिवर्तनशील है। आज की नई पीढ़ी जो वर्तमान को बदलना चाहती है, कल जब वह पुरानी हो जाएगी, तो उसे अपना 'आज' ही सबसे अच्छा लगेगा। यह चक्र चलता रहता है, जहाँ हर पीढ़ी अपने बीते हुए समय को 'सुनहरा युग' मानती है।

4. "निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है।"

विस्तार: निबंध की श्रेष्ठता उसकी लंबाई में नहीं, बल्कि उसकी सघनता और सुंदरता में होती है। छोटे निबंध में लेखक अपने विचारों को स्पष्टता और प्रभाव के साथ कह पाता है, जबकि बड़े निबंधों में अक्सर विषय भटक जाता है और रोचकता कम हो जाती है।

 

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी के निबंध 'क्या लिखूँ?' के अभ्यास खंड 'मेरा अनुभव' (पृष्ठ संख्या 38) का हल नीचे दिया गया है। यह प्रश्न आपके व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित है, इसलिए आप इसे अपनी पसंद के अनुसार भी लिख सकते हैं। यहाँ एक आदर्श उत्तर दिया गया है:


मेरा अनुभव (हल)

प्रश्न: इस निबंध में लेखक को दो विषयों ('दूर के ढोल सुहावने होते हैं' और 'समाज-सुधार') पर निबंध लिखने थे। पिछली कक्षाओं में आपने भी बहुत से विषयों पर अनुच्छेद, संवाद और निबंध लिखे हैं। आपको किन विषयों पर लिखना सरल या कठिन लगा और क्यों?

उत्तर: मेरे पिछले अनुभवों के आधार पर विषयों का विश्लेषण इस प्रकार है:

1. सरल लगने वाले विषय (अनुभवात्मक विषय)

मुझे 'मेरे जीवन का लक्ष्य', 'मेरा प्रिय त्योहार' या 'परहित सरिस धरम नहिं भाई' जैसे विषयों पर लिखना सरल लगा।

  • कारण: इन विषयों का संबंध सीधे हमारे जीवन, भावनाओं और दैनिक अनुभवों से होता है। इनके लिए हमें किसी पुस्तकालय या बाहरी सामग्री की आवश्यकता नहीं पड़ती। हम अपने मन के भावों को 'स्वच्छंद' रूप से लिख सकते हैं, जैसा कि मानटेन की पद्धति में बताया गया है।

2. कठिन लगने वाले विषय (तथ्यात्मक या दार्शनिक विषय)

मुझे 'बढ़ती जनसंख्या: एक अभिशाप', 'भ्रष्टाचार' या 'विज्ञान: वरदान या अभिशाप' जैसे विषयों पर लिखना कठिन लगा।

  • कारण: इन विषयों पर लिखने के लिए केवल भावनाओं से काम नहीं चलता। इनके लिए सटीक आंकड़ों (Data), तथ्यों और विद्वानों के मतों की आवश्यकता होती है। यदि हमारे पास सामग्री (Content) की कमी हो, तो इन पर एक लंबा और प्रभावशाली निबंध लिखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

तीसरा दिन 


सीख (निबंध के संदर्भ में)

लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी की तरह मैंने भी यह महसूस किया कि जब हमें किसी ऐसे विषय पर लिखना पड़ता है जिसका हमने गहरा अध्ययन नहीं किया (जैसे 'समाज-सुधार'), तो सबसे बड़ी कठिनाई 'उपयुक्त सामग्री जुटाने' और 'रूपरेखा बनाने' में आती है।

'विषयों से संवाद' (पृष्ठ संख्या 38) के हल नीचे दिए गए हैं:


विषयों से संवाद (उत्तर और जानकारी)

1. महान व्यक्तियों के कार्य (संक्षेप में)

निबंध में उल्लिखित महापुरुषों ने अपने-अपने समय में समाज को नई दिशा दी:

  • बुद्धदेव और महावीर स्वामी: इन्होंने अहिंसा, प्रेम और समानता का संदेश दिया तथा जाति-पाति व कर्मकांडों का विरोध किया।
  • शंकराचार्य: इन्होंने अद्वैत वेदांत का प्रचार किया और सांस्कृतिक एकता के लिए भारत के चारों कोनों में मठों की स्थापना की।
  • कबीर और नानक: इन्होंने बाह्य आडंबरों (दिखावे) का विरोध किया और सामाजिक समरसता व ईश्वर की एकता पर बल दिया।
  • राजा राममोहन राय: इन्होंने सती प्रथा जैसी कुरीतियों को समाप्त करने और आधुनिक शिक्षा के प्रसार में मुख्य भूमिका निभाई।
  • स्वामी दयानंद: 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और छुआछूत व अंधविश्वास के विरुद्ध समाज को जागृत किया।
  • महात्मा गांधी: सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश को आजाद कराया और छुआछूत निवारण व ग्रामोद्धार के कार्य किए।

2. वर्तमान में समाज-सुधार में कार्यरत व्यक्ति/संस्थाएँ

आज के समय में भी कई लोग और संस्थाएँ विशिष्ट क्षेत्रों में कार्य कर रही हैं:

  • स्त्री-शिक्षा: मलाला युसुफ़ज़ई (Malala Fund) और सावित्रीबाई फुले के आदर्शों पर चलने वाली अनेक संस्थाएँ।
  • पर्यावरण: चंडी प्रसाद भट्ट और सुंदरलाल बहुगुणा (चिपको आंदोलन), तथा वर्तमान में जादव पायेंग (The Forest Man of India)
  • दिव्यांगजन: हेलेन केलर इंस्टीट्यूट या स्थानीय सरकारी विकास केंद्र जो विशेष आवश्यकता वाले समूहों के लिए काम करते हैं।

3. यदि आपको 'समाज-सुधार' का अवसर मिले (स्व-लेखन हेतु)

सुझाव: यदि मुझे अवसर मिले, तो मैं 'शिक्षा में नैतिक मूल्यों' और 'स्वच्छता' पर कार्य करना चाहूँगा। मैं युवाओं को डिजिटल साक्षरता के साथ-साथ दूसरों के प्रति संवेदनशीलता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करूँगा, ताकि समाज भीतर से मजबूत बन सके।

4. नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन में संतुलन

भारतीय ज्ञान साहित्य (जैसे गीता या उपनिषद) सिखाते हैं कि केवल आध्यात्मिक होना या केवल भौतिकवादी होना अधूरा है।

  • नैतिकता हमें सही-गलत का बोध कराती है।
  • अध्यात्म हमें मानसिक शांति और उद्देश्य देता है।
  • व्यवहारिकता हमें संसार में सक्रिय रहने और जिम्मेदारियाँ निभाने में मदद करती है। इन तीनों का संतुलन ही एक सफल और सुखी जीवन का आधार है।

सृजन (एक संक्षिप्त लेख)

लोकोक्ति: "आम के आम गुठलियों के दाम" और विषय: "जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास"

लेख: अक्सर हम फल खाकर उनके छिलके और बीज कचरे में फेंक देते हैं, लेकिन यदि हम 'जैविक खाद' बनाना शुरू करें, तो यह "आम के आम गुठलियों के दाम" वाली बात सिद्ध होगी। रसोई के कचरे (छिलके, सड़ी सब्जियाँ) से हम अपने बगीचे के लिए उत्तम खाद तैयार कर सकते हैं। इससे न केवल कचरा प्रबंधन होगा, बल्कि हमें रासायनिक मुक्त फल-सब्जियाँ भी मिलेंगी। यह हमारे पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभप्रद है।

सृजन: उत्तर 2 (डायरी लेखन)

प्रश्न: अपने अनुभव के आधार पर किसी ऐसी घटना का उल्लेख अपनी डायरी में कीजिए, जब किसी वस्तु, व्यक्ति या संस्था के विषय में दूर से आपका अनुमान कुछ और रहा हो, पर निकट से आपका अनुभव बिल्कुल अलग रहा हो।

डायरी लेखन का एक नमूना:

दिनांक: 25 अक्टूबर, 2023 समय: रात्रि 9:00 बजे

आज मुझे बख्शी जी की वह बात याद आ गई कि "दूर के ढोल सुहावने होते हैं"। अक्सर हम बाहर से चमकने वाली चीज़ों को बहुत श्रेष्ठ मान लेते हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही होती है।

पिछले महीने तक मैं अपने शहर के उस नए 'मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल' के बारे में बहुत ऊँचे विचार रखता था। बाहर से उसकी भव्य इमारत, काँच की दीवारें और चमकती लाइटें देखकर लगता था कि वहाँ कदम रखते ही मरीज़ आधा ठीक हो जाता होगा। मुझे लगता था कि वहाँ के कर्मचारी बहुत मददगार और व्यवस्था विश्वस्तरीय होगी।

लेकिन आज जब मुझे अपने मित्र के इलाज के लिए वहाँ जाना पड़ा, तो मेरा भ्रम टूट गया। वह भव्यता केवल बाहरी थी। अंदर कदम रखते ही पता चला कि वहाँ केवल पैसों की दौड़ है। स्टॉफ का व्यवहार रूखा था और मरीज़ों से ज़्यादा मशीनों को महत्व दिया जा रहा था। जिस शांति और सेवा की मैंने कल्पना की थी, वहाँ उसकी जगह केवल व्यावसायिकता और कोलाहल था।

आज मैंने सीखा कि किसी भी चीज़ की बाहरी चकाचौंध से उसके आंतरिक गुण का पता नहीं चलता। सचमुच, दूर से दिखने वाली मधुरता निकट जाने पर अक्सर कर्कश अनुभव में बदल जाती है।


निष्कर्ष (तर्क):

लेखक ने जिस प्रकार ढोल की आवाज़ का उदाहरण दिया है कि वह दूर से मधुर और पास से कर्कश लगती है, वैसे ही जीवन में कई बार संस्थाएँ (अस्पताल ) या व्यक्ति दूर से बहुत प्रभावशाली लगते हैं, परंतु उनके साथ वास्तविक समय बिताने पर हमें उनकी कमियों या कठोर सच्चाई का पता चलता है।


चोथा दिन 

'भाषा से संवाद' (पृष्ठ संख्या 39-41) का संपूर्ण हल नीचे दिया गया है:


1. समास (व्याकरण की बात)

पाठ में आए प्रमुख सामासिक शब्दों का विग्रह और उनके प्रकार:

सामासिक पद

समास विग्रह

समास का नाम

निबंधशास्त्र

निबंध का शास्त्र

तत्पुरुष समास

विवाहोत्सव

विवाह का उत्सव

तत्पुरुष समास

जीवन-संग्राम

जीवन का संग्राम

तत्पुरुष समास

नगर-नगर

नगर और नगर (प्रत्येक नगर)

अव्ययीभाव समास

गाँव-गाँव

गाँव और गाँव (प्रत्येक गाँव)

अव्ययीभाव समास

अनादि

जिसका आदि न हो

नञ् तत्पुरुष

प्रतिभावान

प्रतिभा से युक्त

तत्पुरुष समास

नव-वधू

नई है जो वधू

कर्मधारय समास

यथाशक्ति

शक्ति के अनुसार

अव्ययीभाव समास

दिनोदिन

दिन ही दिन में

अव्ययीभाव समास


2. उपसर्ग और प्रत्यय

अभ्यास 2: उचित उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर वाक्य पूरे कीजिए:

  • (क) निबंध लिखना बड़ी कठिनाई (कठिन + आई) की बात है।
  • (ख) वर्तमान से दोनों को असंतोष (अ + संतोष) होता है।
  • (ग) वाक्यों में कुछ अस्पष्टता (अ + स्पष्ट + ता) भी चाहिए, क्योंकि यह अस्पष्टता या दुर्बोधता (दुर + बोध + ता) गांभीर्य ला देती है।

अभ्यास 3: नए शब्द बनाकर लिखिए:

मूल शब्द

नए शब्द (उपसर्ग/प्रत्यय सहित)

मधुर

मधुरता, सुमधुर, मधुरिमा

सुधार

सुधारक, सुधारवादी, पुनसुधार

सुंदर

सुंदरता, सौंदर्य, सुंदरी

गति

प्रगति, गतिशीलता, दुर्गति

समाज

सामाजिक, समाजवाद, असामाजिक


3. एक शब्द - भाव अनेक (समानार्थी शब्द)

पाठ में कुछ ऐसे शब्द समूहों का प्रयोग है जिनके अर्थ मिलते-जुलते हैं, पर संदर्भ अलग हैं:

  1. विचार - मनन - चिंतन:
    • विचार: किसी विषय पर सामान्य सोच। (वाक्य: मेरे मन में एक नया विचार आया है।)
    • मनन: किसी विषय पर गहराई से सोचना। (वाक्य: गुरु के उपदेशों पर मनन करना चाहिए।)
    • चिंतन: किसी समस्या के समाधान के लिए गंभीर सोच। (वाक्य: लेखक को निबंध की सामग्री के लिए बहुत चिंतन करना पड़ा।)
  2. सुहावने - मधुर - मनमोहक:
    • सुहावने: जो देखने या सुनने में सुखद लगे। (वाक्य: दूर के ढोल सुहावने होते हैं।)
    • मधुर: जिसकी ध्वनि मीठी हो। (वाक्य: कोयल की आवाज़ बहुत मधुर होती है।)
    • मनमोहक: जो मन को मोह ले। (वाक्य: पहाड़ों का दृश्य अत्यंत मनमोहक है।)

4. भाषा संगम (निबंध शब्द के विभिन्न रूप)

पाठ में दी गई सूची के अनुसार 'निबंध' को अन्य भाषाओं में इस प्रकार कहा जाता है:

  • संस्कृत: निबंध:
  • उर्दू/कश्मीरी: मजमून
  • मराठी/गुजराती: निबंध
  • तमिल: कट्टुरै (Katturai)
  • तेलुगु: व्यासमु (Vyasamu)

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी के निबंध 'क्या लिखूँ?' के अभ्यास खंड 'भाषा एक शब्द अनेक' (पृष्ठ संख्या 41) का हल नीचे दिया गया है। इसमें ऐसे शब्दों का विश्लेषण है जिनके अर्थ मिलते-जुलते हैं, परंतु उनके प्रयोग का संदर्भ अलग-अलग होता है।


भाषा एक शब्द अनेक (अर्थ और वाक्य प्रयोग)

1. विचार - मनन - चिंतन

ये तीनों शब्द सोचने की प्रक्रिया से जुड़े हैं, लेकिन इनकी गहराई अलग है:

  • विचार: किसी विषय पर सामान्य रूप से सोचना या कोई राय बनाना।
    • वाक्य: मेरे मन में एक विचार आया कि क्यों न हम कल पुस्तकालय चलें।
  • मनन: पढ़ी या सुनी हुई बात को याद करके उस पर गहराई से विचार करना।
    • वाक्य: विद्वानों के उपदेशों को केवल सुनना पर्याप्त नहीं, उन पर मनन करना भी आवश्यक है।
  • चिंतन: किसी गंभीर समस्या या दार्शनिक विषय पर एकाग्र होकर गहराई से सोचना।
    • वाक्य: ऋषि-मुनि एकांत में बैठकर ईश्वर के स्वरूप का चिंतन करते हैं।

2. सुहावने - मधुर - मनमोहक

ये तीनों शब्द सुखद अनुभूति कराते हैं, पर इनका आधार अलग है:

  • सुहावने: जो स्थिति या वस्तु देखने/सुनने में सुखद और अनुकूल लगे।
    • वाक्य: लेखक ने सच ही कहा है कि दूर के ढोल सुहावने होते हैं।
  • मधुर: विशेष रूप से वह ध्वनि जो कानों को मीठी और प्रिय लगे।
    • वाक्य: वसंत ऋतु में कोयल का मधुर गान सबको अपनी ओर खींच लेता है।
  • मनमोहक: जो अपनी सुंदरता से मन को पूरी तरह मोह ले या आकर्षित कर ले।
    • वाक्य: कश्मीर की घाटियों का दृश्य अत्यंत मनमोहक होता है।

3. दोष - त्रुटि - अपराध

(पाठ के संदर्भ में अतिरिक्त उदाहरण)

  • दोष: स्वभाव या चरित्र की बुराई या कमी।
    • वाक्य: समय के साथ पुराने सुधार ही समाज के लिए दोष बन जाते हैं।
  • त्रुटि: काम में होने वाली अनजानी भूल या कमी।
    • वाक्य: टाइपिंग करते समय मुझसे एक छोटी सी त्रुटि हो गई।
  • अपराध: कानून या सामाजिक नियमों का उल्लंघन करना।
    • वाक्य: चोरी करना एक कानूनी अपराध है।

पांचवा दिन 


सारांश तालिका

शब्द समूह

सूक्ष्म अंतर

विचार/मनन/चिंतन

सामान्य सोच $\rightarrow$ गहराई से सोच $\rightarrow$ समस्या का समाधान/दर्शन

सुहावने/मधुर/मनमोहक

सुखद स्थिति $\rightarrow$ मीठी ध्वनि $\rightarrow$ आकर्षक दृश्य

गतिविधियाँ (हल)

1. अमीर खुसरो की अनमेलियाँ, मुकरियाँ और पहेलियाँ

पाठ में अमीर खुसरो की एक प्रसिद्ध 'अनमेली' दी गई है। अनमेली वह शैली है जिसमें अलग-अलग विषयों को जोड़कर मनोरंजन किया जाता है। यहाँ खुसरो के कुछ अन्य प्रसिद्ध उदाहरण दिए जा रहे हैं:

  • अनमेली (एक और उदाहरण):

"खीर पकायी जतन से, चरखा दिया चला।

आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा।।"

(नोट: यह आपके पाठ में पहले से मौजूद है, इसका अर्थ है कि मेहनत किसी ने की और फल कोई और ले गया, और अंत में केवल शोर रह गया।)

  • पहेली:

"एक थाल मोती से भरा, सबके सिर पर औंधा धरा।

चारों ओर वह थाली फिरे, मोती उससे एक न गिरे।।"

उत्तर: आकाश और तारे।

  • मुकरी (मुकर जाना):

"वह आए तो शादी होय, उस बिन दूजा और न कोय।

मीठे लागें वाके बोल, ऐ सखि साजन? ना सखि ढोल।"

(इसमें नायिका पहले साजन की बात करती है पर अंत में मुकर कर उत्तर बदल देती है।)


2. वाद-विवाद: 'युवा और वृद्ध- दो पीढ़ियों के पीढ़ीगत अंतर' (Generation Gap)

कक्षा में वाद-विवाद के लिए आप निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं का उपयोग कर सकते हैं:

पक्ष (युवा पीढ़ी के विचार):

  • परिवर्तन की चाह: युवा वर्तमान की समस्याओं को तुरंत बदलना चाहते हैं (क्रांति के समर्थक)।
  • भविष्योन्मुखी: वे भविष्य के सपने देखते हैं और नई तकनीक व आधुनिकता को अपनाना चाहते हैं।
  • तर्क: वे पुरानी परंपराओं को तभी मानना चाहते हैं जब उनका कोई वैज्ञानिक आधार हो।

विपक्ष (वृद्ध पीढ़ी के विचार):

  • अनुभव का महत्व: बुजुर्गों के पास जीवन का लंबा अनुभव होता है, जो जल्दबाजी में लिए गए फैसलों से बचाता है।
  • अतीत का गौरव: वे पुरानी परंपराओं और नैतिक मूल्यों के संरक्षक होते हैं।
  • तर्क: वे वर्तमान की अस्थिरता से डरते हैं और चाहते हैं कि नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।

निष्कर्ष: दोनों पीढ़ियों के बीच का अंतर अनिवार्य है। समाज की प्रगति के लिए युवाओं का उत्साह और वृद्धों का मार्गदर्शन—दोनों का सामंजस्य (Balance) आवश्यक है।

भाषा संगम (हल)

इस खंड में मुख्य रूप से यह बताया गया है कि भारत की विभिन्न भाषाओं में 'निबंध' शब्द के लिए किन-किन शब्दों का प्रयोग किया जाता है।

1. भारतीय भाषाओं में 'निबंध' के नाम

पाठ्यपुस्तक में दी गई सूची के अनुसार:

  • हिंदी, संस्कृत, पंजाबी, मराठी, गुजराती, कोंकणी, नेपाली: निबंध / निबंधः
  • उर्दू, कश्मीरी, सिन्धी: मजमून / मज्मूनु
  • बांग्ला: निबंध, प्रबंध
  • असमिया: निबंध-रचना
  • मणिपुरी: निबंध, वाङ्
  • ओड़िआ: प्रबंध, रचना
  • तेलुगु: व्यासमु (Vyasamu)
  • तमिल: कट्टुरै (Katturai)
  • मलयालम: उपन्यासम् (Upanyasam)
  • कन्नड़: लेख, प्रबंध

2. अतिरिक्त भाषा में 'निबंध' शब्द

यदि हम अन्य भाषाओं की बात करें, तो 'निबंध' को इस प्रकार भी जाना जाता है:

  • अंग्रेजी: Essay (एस्से)
  • अरबी: مقالة (मक़ाला)

3. मातृभाषा में अनुवाद (उदाहरण)

पाठ में दिए गए वाक्य "निबंध लिखने के पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए" का विभिन्न मातृभाषाओं में अनुवाद (उदाहरण के लिए):

  • अंग्रेजी: "Before writing an essay, its outline should be prepared."
  • उर्दू: "मज़मून लिखने से पहले उसका खाका बना लेना चाहिए।"
  • मराठी: "निबंध लिहिण्यापूर्वी त्याची रूपरेषा तयार केली पाहिजे."
  • बांग्ला: "প্রবন্ধ লেখার আগে তার রূপরেखा তৈরি করা উচিত।" (Prabandha lekhar age tar ruprekha toiri kora uchit.)

: झरोखे से

पृष्ठ 43 पर सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' का एक संक्षिप्त लेख दिया गया है, जिसका शीर्षक है 'मैं क्यों लिखता हूँ?'

मुख्य विचार:

  • लेखक बाहरी दबाव (संपादक, पैसा, प्रसिद्धि) के लिए नहीं, बल्कि अपनी आंतरिक विवशता और बेचैनी से मुक्ति पाने के लिए लिखता है।
  • लिखने के बाद ही लेखक उस दबाव को तटस्थ होकर देख पाता है और उससे मुक्त होता है।

खोजबीन: महान साहित्यकारों का परिचय

1. भारतीय साहित्यकार और विचारक

  • बाणभट्ट: ये संस्कृत के महान गद्य लेखक थे और सम्राट हर्षवर्धन के दरबारी कवि थे। इनकी प्रसिद्ध रचना 'कादंबरी' दुनिया का पहला उपन्यास माना जाता है। निबंध में इनके लंबे और जटिल वाक्यों का उल्लेख किया गया है।
  • श्रीहर्ष: ये 12वीं शताब्दी के संस्कृत कवि थे। इन्होंने 'नैषधीयचरितम्' नामक महाकाव्य लिखा। ये अपनी विद्वता और कठिन काव्य-ग्रंथियों (गुत्थियों) के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • अमीर खुसरो: ये सूफी संत, कवि और संगीतकार थे। इन्हें 'खड़ी बोली' हिंदी का पहला कवि माना जाता है। इन्होंने पहेलियाँ, मुकरियाँ और 'अनमेलियाँ' (जैसे खीर, कुत्ता, ढोल वाली कहानी) लिखकर जनमानस का मनोरंजन किया।
  • सेनापति: ये रीतिकाल के प्रसिद्ध हिंदी कवि थे। ये अपने 'ऋतु वर्णन' और श्लेष अलंकार के प्रयोग के लिए जाने जाते हैं। इनकी कविताएँ अक्सर 'दुर्बोध' (कठिन) मानी जाती हैं।
  • महात्मा गांधी: भारत के राष्ट्रपिता, जिन्होंने सत्य और अहिंसा के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया। साहित्य में उनकी आत्मकथा 'सत्य के प्रयोग' और उनके लेख समाज-सुधार की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

2. पाश्चात्य (विदेशी) साहित्यकार

  • ए.जी. गार्डिनर (A.G. Gardiner): ये अंग्रेजी के प्रसिद्ध निबंधकार थे जो 'अल्फा ऑफ द प्लॉ' (Alpha of the Plough) उपनाम से लिखते थे। ये अपने सरल, व्यक्तिगत और हास्यपूर्ण निबंधों के लिए प्रसिद्ध हैं। निबंध में इनके 'मानसिक वेग' और 'हैट-खूँटी' के उदाहरण का उल्लेख है।
  • विलियम शेक्सपीयर (William Shakespeare): इन्हें अंग्रेजी भाषा का सबसे महान नाटककार और कवि माना जाता है। पाठ में उनके नाटकों के नामकरण (जैसे: As You Like It) की कठिनाई का जिक्र किया गया है।
  • मानटेन (Michel de Montaigne): ये फ्रांसीसी लेखक थे जिन्हें 'निबंध विधा का जनक' माना जाता है। इन्होंने 'स्वच्छंद' शैली में निबंध लिखे, जो किसी नियम में बँधे न होकर लेखक के व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित थे।

सारांश तालिका

साहित्यकार

विधा/क्षेत्र

मुख्य विशेषता (पाठ के अनुसार)

बाणभट्ट

संस्कृत गद्य

लंबे और पांडित्यपूर्ण वाक्य।

अमीर खुसरो

हिंदी/फारसी

बहुमुखी प्रतिभा और मनोरंजक पहेलियाँ।

मानटेन

फ्रांसीसी निबंध

व्यक्तिगत अनुभव और स्वच्छंद शैली।

ए.जी. गार्डिनर

अंग्रेजी निबंध

 

 

 

 

 

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