अगर मैं भूल जाऊं तुझे, तो याद दिला देना,
जैसे तू सर्द रातों में गर्मी का पल पल देना।
तेरी हंसी की मिठास, तेरे शब्दों का प्यार,
अगर मैं भूला जाऊं, तो याद दिला देना बार-बार।
जब हो दूर मैं तुझसे, और मेरी यादें मुरझा जाएं,
तू मेरे दिल की वो चाबी फिर से चला देना।
जब भी खामोशी मुझ पर हावी हो जाए,
तेरी आवाज़ की लहरें मुझे फिर से बहा देना।
तेरे चेहरे की मुस्कान जो कभी हल्की सी बिखरी थी,
अगर मैं वो भूल जाऊं, तो याद दिला देना।
तेरी आँखों का वो गहरा सा सागर,
जो मेरे हर दर्द को चुपके से सहलाता था,
अगर कभी वो तसवीर मुझे धुंधली लगे,
तो तू मुझे फिर से उसकी चमक दिखा देना।
अगर मेरी राहें मुझसे उलझने लगें,
तो तू अपना हाथ मेरी ओर बढ़ा देना।
जब मैं खो जाऊं अपने ही ख्यालों में,
तो मुझे अपने ख्वाबों में फिर से खो जाना देना।
अगर मैं दिन-रात की धुंध में गुम हो जाऊं,
तो तेरी यादों की बर्फ़ से मुझे फिर से तरो ताज़ा कर देना।
तेरे होने की वो अहसास, जो मैंने सीखा था कभी,
अगर मैं उसे भूल जाऊं, तो उसे फिर से मुझे सिखा देना।
अगर मैं भूल जाऊं तुझे, तो याद दिला देना,
तेरी यादों में बसी यह दुनिया, मुझे फिर से सजा देना।
जिंदगी की राहों में, जो भी कहीं खो जाऊं,
बस इतना कहना, मुझे तुझसे कभी दूर न जाने देना।
दीप
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