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'संवादहीन'

 लेखक परिचय 

शेखर जोशी हिंदी साहित्य के 'नई कहानी आंदोलन' के एक अत्यंत प्रतिष्ठित और महत्वपूर्ण लेखक हैं। इस पाठ के लेखक शेखर जोशी के बारे में कुछ बेहद रोचक और महत्वपूर्ण बातें निम्नलिखित हैं:

## 1. उत्तराखंड की वादियों से जुड़ाव

शेखर जोशी का जन्म सन् 1932 में अल्मोड़ा (उत्तराखंड) के एक पहाड़ी परिवेश में हुआ था। यही कारण है कि उनकी रचनाओं में पहाड़ का जनजीवन, वहाँ की संस्कृति और सादगी बहुत ही जीवंत रूप में दिखाई देती है। उनकी प्रसिद्ध रचना 'मेरा पहाड़' इसका सुंदर उदाहरण है।

## 2. सैनिक और औद्योगिक पृष्ठभूमि का प्रभाव

कम ही लोग जानते हैं कि शेखर जोशी ने कुछ समय तक डिफेंस सिविलियन के रूप में भारतीय सेना के ई.एम.ई. (EME) वर्कशॉप में भी काम किया था। इस औद्योगिक माहौल और मजदूरों के बीच रहने के कारण उन्होंने कारखानों में काम करने वाले मजदूरों के जीवन-संघर्षों को अपनी कहानियों में बहुत गहराई से और प्रामाणिकता के साथ उभारा।

## 3. 'कोसी का घटवार' और 'दाज्यू' जैसी कालजयी रचनाएँ

  • कोसी का घटवार (1958): यह उनका पहला कहानी संग्रह था जिसने उन्हें हिंदी साहित्य जगत में रातों-रात एक नई पहचान दी। यह आज भी हिंदी की सबसे बेहतरीन प्रेम कहानियों में से एक मानी जाती है।

  • दाज्यू: उनकी इस बेहद लोकप्रिय कहानी पर बाल चित्र समिति (Children's Film Society) द्वारा एक फिल्म का निर्माण भी किया गया है, जो एक पहाड़ी बच्चे की संवेदनशीलता को दर्शाती है।

## 4. नई कहानी आंदोलन के प्रमुख हस्ताक्षर

1950 और 60 के दशक में जब हिंदी में 'नई कहानी आंदोलन' चल रहा था, तब शेखर जोशी ने पारंपरिक ढांचों से अलग हटकर मध्यवर्गीय समाज के यथार्थ और मनुष्य के अकेलेपन को अपनी कहानियों का केंद्र बनाया। 'संवादहीन' कहानी भी इसी अकेलेपन और मानवीय संवेदना का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

## 5. बड़े सम्मान और पुरस्कार

साहित्य में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया, जिनमें मुख्य हैं:

  • महावीर प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार (उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा)

  • साहित्य भूषण सम्मान

  • अखिल भारतीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान (मध्य प्रदेश शासन द्वारा)

  • श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य पुरस्कार


एक दुखद सत्य: हिंदी साहित्य को अपनी अनमोल कहानियों से समृद्ध करने वाले इस महान रचनाकार का निधन हाल ही में सन् 2022 में हुआ। लेकिन अपनी अमर रचनाओं के माध्यम से वे हमेशा पाठकों के दिलों में जीवित रहेंगे।


पाठ का सार

जोशी जी की कहानी 'संवादहीन' आधुनिक समाज में बढ़ते अकेलेपन, महानगरीय जीवन की संवेदनहीनता और मानवीय रिश्तों के बीच पैदा होती दूरी को दर्शाती है।

इस कहानी का मुख्य सार और संदेश निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:

1. संवादहीनता (Communication Gap) ही मुख्य समस्या है

कहानी का शीर्षक ही इसके मूल भाव को स्पष्ट करता है। आधुनिक जीवन में लोग एक ही छत के नीचे या एक ही समाज में रहते हुए भी एक-दूसरे से बात नहीं करते। व्यस्तता और अपनी ही दुनिया में खोए रहने के कारण अपनों के बीच भी बातचीत का अभाव (चुप रहने की आदत) हो जाता है, जो मानसिक अकेलेपन को जन्म देता है।

2. मानवीय संवेदनाओं का ह्रास

शेखर जोशी ने इस बात पर गहरा प्रहार किया है कि कैसे आज का इंसान मशीनी होता जा रहा है। दूसरों के सुख-दुख से हमें कोई सरोकार नहीं रह गया है। पड़ोस में क्या हो रहा है या किसी करीबी को क्या तकलीफ है, यह जानने की फुर्सत किसी के पास नहीं है। कहानी यह याद दिलाती है कि बिना संवाद के इंसान भीतर से खोखला होने लगता है।

3. मध्यवर्गीय समाज का यथार्थ

लेखक ने मध्यवर्गीय परिवार और समाज की कड़वी सच्चाई को सामने रखा है। दिखावे की संस्कृति और आर्थिक रूप से खुद को बेहतर बनाने की होड़ में इंसान उन बुनियादी भावनाओं को पीछे छोड़ देता है, जो समाज को जोड़े रखती हैं।

4. अकेलेपन की त्रासदी

कहानी में व्यक्ति के उस अकेलेपन को उभारा गया है, जो भीड़ में रहने के बावजूद भी खत्म नहीं होता। जब व्यक्ति अपनी भावनाओं को किसी से व्यक्त नहीं कर पाता, तो वह 'संवादहीनता' का शिकार होकर मानसिक रूप से टूट जाता है।


मुख्य संदेश:  यह पाठ हमें यह सीख देता है कि तकनीक और प्रगति के इस दौर में हमें अपनी मानवीय संवेदनाओं को मरने नहीं देना चाहिए। अपनों से बातचीत करना, उनके सुख-दुख को साझा करना और संवाद बनाए रखना एक स्वस्थ और संवेदनशील समाज के लिए बेहद जरूरी है। 


शेखर जोशी द्वारा रचित कहानी 'संवादहीन' के पृष्ठ 46 से 51 तक का पृष्ठ-वार सार (अलग-अलग) और उनमें आए प्रमुख कठिन शब्दों के अर्थ नीचे दिए गए हैं:


## पृष्ठ 46 (कहानी का पहला पृष्ठ)

* कठिन शब्द और अर्थ

  • नैया पार लगना: संकट या मुश्किल से उद्धार होना।

  • सूने खंडहर: वीरान या उजाड़ हो चुकी इमारत।

  • पूत-परिवार: बेटा और भरा-पूरा परिवार।

  • हाथ पीले कराना: बेटी की शादी संपन्न कराना।

  • दो जून का एक जून: दो समय के भोजन की जगह केवल एक समय का भोजन बनाना।

  • भाँय-भाँय करना: सन्नाटे या अकेलेपन के कारण डर पैदा होना (सूनापन)।

  • कुशाग्र बुद्धि: बहुत तेज या तीक्ष्ण दिमाग वाला।

  • गुलजार होना: चहल-पहल होना या रौनक आ जाना।

* पृष्ठ का सार

इस पृष्ठ में ताई के अकेलेपन और उनके जीवन में तोते (मिट्ठू) के प्रवेश को दिखाया गया है। ताई एक समय भरे-पूरे वैभवशाली परिवार में रहती थीं, लेकिन अब उनके बहू-बेटे शहर जा चुके हैं और बेटियाँ ब्याह कर चली गई हैं। घर के इस डराने वाले सूनेपन को दूर करने के लिए 'गनपत' उन्हें एक पहाड़ी तोता लाकर देता है। मिट्ठू के आने से ताई के जीवन में रौनक लौट आती है। जो ताई अपने लिए चूल्हा जलाने में आलस करती थीं, वे अब मिट्ठू के लिए नियम से दाल-भात बनाने लगती हैं और उसके लिए मिर्च-अमरूद का प्रबंध करती हैं। मिट्ठू भी इतना कुशाग्र है कि वह ताई की बातें दोहराकर उनका अकेलापन दूर करता है, जिससे अड़ोस-पड़ोस के बच्चे भी वहाँ जुटने लगते हैं।



## पृष्ठ 47

* कठिन शब्द और अर्थ

  • पौ फटना: प्रातःकाल का प्रकाश होना, सुबह होना।

  • अचकचाकर: चौंककर या भौचक्का होकर उठना।

  • निहाल होना: अत्यधिक प्रसन्न या हर तरह से तृप्त होना।

  • अलस दोपहरी: आलस से भरी दोपहर।

  • राम-कहानी: अपने जीवन की आपबीती या सुख-दुख की कहानी।

* पृष्ठ का सार

सुबह होते ही मिट्ठू ताई को 'हर हर गंगे' और 'सीताराम' बोलकर बड़े लाड से जगाता है और ताई भी उसे जुग-जुग जीने का आशीर्वाद देती हैं। वृद्धावस्था के इस दौर में मिट्ठू ताई का सबसे बड़ा मानसिक संबल बन जाता है। जब ताई काम-काज से थककर सुस्ताने बैठती हैं और मिट्ठू से पूछती हैं कि "अब जिंदगी कैसे कटेगी?", तो मिट्ठू बड़े दमखम से जवाब देता है "कटेगी! कटेगी! कटेगी!"। इसके बाद दोपहर के सन्नाटे में ताई मिट्ठू को अपने पुराने जमींदारी के वैभव, हाथी-घोड़े, उत्सवों और ब्याह-शादियों के बीते दिनों की गाथाएँ सुनाती हैं और मिट्ठू एक अच्छे श्रोता की तरह गर्दन टेढ़ी करके सुनता है।


## पृष्ठ 48

* कठिन शब्द और अर्थ

  • तुनकमिजाजी: चिड़चिड़ा स्वभाव या छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा होना।

  • टीका-टिप्पणी: बीच में अपनी राय देना या बोलना।

  • मान-मनौवल: रूठे हुए को मनाना।

  • वियोग: बिछड़ना या जुदाई।

  • साँकलें टोहना: दरवाजे की कुंडी या जंजीर को बार-बार छूकर पक्का करना।

  • परलोक की चिंता: मृत्यु के बाद के जीवन या मोक्ष की चिंता।

  • पशोपेश: दुविधा या असमंजस की स्थिति।

* पृष्ठ का सार

इस पृष्ठ में ताई और मिट्ठू के गहरे जुड़ाव और ताई की दुविधा का वर्णन है। ताई और मिट्ठू में हमेशा प्रेम ही नहीं रहता, कभी-कभी मिट्ठू अपनी जिद में दाने-पानी की कटोरी उलट देता है और दोनों में खट्टी-मीठी नोक-झोंक होती है। ताई मिट्ठू को कंजूस के धन की तरह सहेज कर रखती हैं और थोड़ी देर के लिए भी बाहर जाती हैं तो ताले-कुंडी को दस बार चेक करती हैं। इसी बीच, गाँव के लोग कुंभ-स्नान के लिए प्रयागराज जाने लगते हैं। ताई भी परलोक सुधारने के लिए जाना चाहती हैं, लेकिन मिट्ठू को अकेले छोड़ने की दुविधा उन्हें सताती है। अंत में, जगन मास्टर की पत्नी (मास्टराइन) मिट्ठू की देखरेख की जिम्मेदारी लेती है और ताई रोते हुए मिट्ठू से विदा लेती हैं।


## पृष्ठ 49

* कठिन शब्द और अर्थ

  • महाकुंभ होना: (यहाँ अर्थ है) घर में भारी हलचल या बड़ी समस्या खड़ी होना।

  • मिजाज: स्वभाव या प्रकृति।

  • यातना: कष्ट, पीड़ा या मानसिक दुख।

  • असह्य: जिसे सहन न किया जा सके।

  • प्रायश्चित: पाप या गलती का सुधार करने के लिए किया जाने वाला कार्य।

* पृष्ठ का सार

ताई के जाने के बाद जगन मास्टर के घर में अशांति फैल जाती है। जगन मास्टर अपने सिद्धांतों के पक्के और स्वतंत्र विचारों के व्यक्ति हैं। वे किसी जीव को पिंजरे में कैद रखना पाप समझते हैं। पिंजरे में बंद मिट्ठू को देखकर उन्हें बहुत बेचैनी और आत्मग्लानि होती है। अपनी इस व्याकुलता और पाप के प्रायश्चित के लिए वे एक दिन कमरे का दरवाजा बंद करते हैं और पिंजरे का द्वार खोल देते हैं। वे फर्श पर अनाज के दाने बिखेर देते हैं ताकि मिट्ठू बाहर आ सके। मिट्ठू, जो पिंजरे का आदी हो चुका था, शुरू में बाहर नहीं आता, लेकिन बाद में दाना चुगते हुए पिंजरे की छत पर आकर बैठ जाता है।


## पृष्ठ 50

* कठिन शब्द और अर्थ

  • कौतूहलवश: उत्सुकता के कारण।

  • मशगूल: किसी काम में पूरी तरह व्यस्त होना।

  • आशंका: डर या अनहोनी का संदेह।

  • भ्रम: धोखा या गलतफहमी।

  • एवजी: बदले में काम आने वाला या स्थानापन्न (Substitute)।

* पृष्ठ का सार

जगन मास्टर रोज कमरा बंद करके मिट्ठू को आजाद करने का सुख भोगने लगते हैं। लेकिन तीन-चार दिन बाद, मिट्ठू की नजर खुले रोशनदान पर पड़ती है और वह उत्सुकतावश उड़कर वहाँ बैठ जाता है। जगन मास्टर के बुलाने के बावजूद मिट्ठू खुली दुनिया को देखकर आसमान में उड़ जाता है। आदर्शवादी जगन मास्टर घबराकर बाग में पसीना-पसीना होते हुए उसे ढूंढते हैं, पर मिट्ठू हाथ नहीं आता। अब ताई के लौटने का समय पास आ रहा था और पूरा गाँव चिंतित था कि मिट्ठू के न मिलने पर ताई को गहरा सदमा लगेगा। इस डर से गनपत ताई को भ्रम में रखने के लिए मिट्ठू की ही शक्ल-सूरत का एक दूसरा (एवजी) तोता खरीद लाता है।


## पृष्ठ 51

* कठिन शब्द और अर्थ

  • आग्नेय दृष्टि: गुस्से से भरी लाल आँखें या क्रोधपूर्ण नजर।

  • टुकुर-टुकुर: एकटक या लाचारी से देखना।

  • अमराइयाँ: आम के बाग।

* पृष्ठ का सार

जगन मास्टर अब दिन-रात खाना-पीना छोड़कर उस नए तोते को 'राम-राम', 'सीताराम' और 'हर गंगे' रटाने में जुट जाते हैं, ताकि ताई को शक न हो। बोलते-बोलते उनका गला सूख जाता है, लेकिन नया तोता कुछ नहीं सीखता और उन्हें सिर्फ टुकुर-टुकुर देखता रहता है। जब ताई तीर्थयात्रा से लौटती हैं, तो वे सीधे अपने घर न जाकर जगन मास्टर के यहाँ अपने मिट्ठू से मिलने पहुँचती हैं। उन्हें उम्मीद थी कि मिट्ठू उन्हें देखते ही खुशी से पिंजरे में उछल-कूद मचा देगा, लेकिन वह नया एवजी तोता बिल्कुल शांत बैठा रहता है और कोई हरकत नहीं करता। ताई अपने मिट्ठू को पुकारती रह जाती हैं, लेकिन उनका असली साथी अब आज़ाद होकर कहीं दूर आम के बागों (अमराइयों) में घूम रहा होता है और पिंजरे में केवल 'संवादहीनता' रह जाती है।

पाठ्यपुस्तक के 'रचना से संवाद' (मेरे उत्तर मेरे तर्क) खंड के सभी बहुविकल्पीय प्रश्नों के सटीक उत्तर और उनके पीछे के तर्क नीचे दिए गए हैं:


1. कहानी में ताई और मिट्ठू का संबंध किस भाव को दर्शाता है?

  • सही उत्तर: (ख) ममता और स्नेह

  • तर्क: कहानी में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि मिट्ठू के आने पर ताई की सारी "ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी" थी । वे उसके लिए नियम से भोजन बनाती थीं और वह उनके बुढ़ापे का सहारा बनकर उन्हें दिलासा देता था । इसलिए, उनका संबंध पूरी तरह से निस्वार्थ ममता और गहरे स्नेह पर आधारित है


2. जगन मास्टर द्वारा मिट्ठू को पिंजरे से बाहर निकालना किस भावना या मूल्य का संकेत देता है?

  • सही उत्तर: (घ) करुणा और नैतिकता

  • तर्क: जगन मास्टर स्वतंत्र विचारों के नैतिक व्यक्ति थे जो किसी भी जीव को कैद में रखना पाप या यातना समझते थे । पिंजरे में बंद तोते को देखकर उन्हें आत्मग्लानि (दोषी अनुभव) होती थी । मिट्ठू को आज़ाद करना उनके मन की जीवों के प्रति करुणा और नैतिक सिद्धांतों को दर्शाता है


3. मिट्ठू का उड़ जाना किस विचार को प्रस्तुत करता है?

  • सही उत्तर: (ग) स्वतंत्रता की चाह

  • तर्क: मिट्ठू पिंजरे से बाहर आने के बाद भी कुछ दिन कमरे में ही दाना चुगता रहा, लेकिन जैसे ही उसकी नज़र खुले रोशनदान से बाहर की खुली दुनिया पर पड़ी, वह सहज कौतूहलवश उड़ गया । यह इस बात का प्रतीक है कि सुख-सुविधाओं और भोजन से भी बढ़कर हर जीव के लिए अपनी आज़ादी (स्वतंत्रता) सर्वोपरि होती है


4. ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण क्या था?

  • सही उत्तर: (ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव

  • तर्क: ताई के पास खाने-पीने या पेट की कोई समस्या नहीं थी । उनका मुख्य दुख यह था कि उनके बहू-बेटे गाँव छोड़कर शहरों में बस गए थे और बेटियाँ अपनी गृहस्थी में व्यस्त हो गई थीं । बड़े घर में उनके साथ बात करने वाला कोई नहीं था और इसी अकेलेपन व संवादहीनता (भाँय-भाँय) के कारण वे दुखी रहती थीं


5. कहानी में मानव-समाज में व्याप्त किस विसंगति को उजागर किया गया है?

  • सही उत्तर: (ग) अकेलापन

  • तर्क: यह कहानी मुख्य रूप से आधुनिक समाज में बुजुर्गों के अकेलेपन और सामाजिक पलायन की गंभीर समस्या को उजागर करती है । बच्चों के चले जाने के बाद वृद्ध पीढ़ी समाज और परिवार में कैसे अलग-थलग पड़ जाती है और उनसे बातचीत (संवाद) करने वाला भी कोई नहीं बचता, यही इस कहानी का मुख्य यथार्थपरक संदेश है

पाठ्यपुस्तक के अगले खंड 'मेरी समझ मेरे विचार' (पृष्ठ 53) के सभी प्रश्नों के विस्तृत उत्तर नीचे दिए गए हैं:


1. "भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?" ताई इस वाक्य में किस 'नैया' की बात कर रही हैं? वे यह बात क्यों कह रही हैं?

  • उत्तर: ताई यहाँ अपने जीवन रूपी नैया की बात कर रही हैं

  • कारण: उनके बहू-बेटे गाँव छोड़कर शहरों में बस चुके हैं और बेटियाँ अपनी गृहस्थी में व्यस्त हैं । इस उम्र में उस बड़े घर का सन्नाटा और सूनापन उन्हें काटने को दौड़ता था । बातचीत करने के लिए कोई साथी न होने के कारण वे हताश होकर अपने जीवन के दिन काटने (पार लगाने) की चिंता में यह बात कहती हैं

2. "धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।" इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत किया गया है?

  • उत्तर: इस वाक्य में ताई के पारिवारिक वैभव और जमींदारी के समाप्त होने की घटना की ओर संकेत है । जब उनके बेटे शहर चले गए और घर में कोई पुरुष सदस्य नहीं बचा, तो खेती-बाड़ी और व्यापार को संभालने वाला कोई नहीं था । देखरेख के अभाव में उनका सारा कारबार और संपत्ति धीरे-धीरे दूसरों (पराए लोगों) के नियंत्रण में चली गई

3. "ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी।" क्यों?

  • उत्तर: मनुष्य का यह स्वभाव है कि उसे स्नेह व्यक्त करने के लिए किसी न किसी माध्यम की आवश्यकता होती है। ताई का अपना परिवार उनसे दूर जा चुका था और वे पूरी तरह अकेली थीं । जब गनपत उन्हें वह तोता लाकर देता है, तो उन्हें एक साथी मिल जाता है । अपने इसी अकेलेपन को भरने और वात्सल्य भाव को प्रकट करने के लिए उनकी रुकी हुई ममता मिट्ठू पर उमड़ पड़ती है

4. "अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं।" इस वाक्य द्वारा ताई के व्यक्तित्व में आए परिवर्तनों के विषय में क्या-क्या पता चलता है?

  • उत्तर: इस वाक्य से पता चलता है कि मिट्ठू के आने के बाद ताई के उदासीन और निष्क्रिय जीवन में सकारात्मकता और ऊर्जा आ गई थी

    • जो ताई पहले अपने लिए चूल्हा जलाने में भी आलस्य करती थीं, वे अब किसी की परवाह करने लगी थीं

    • उनका ध्यान अपने दुखों से हटकर बाहरी दुनिया और प्रकृति से जुड़ गया था, क्योंकि वे अपने प्रिय मिट्ठू की पसंद का ख्याल रखना चाहती थीं

5. "जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे।" जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था? कहानी में से उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

  • उत्तर: जगन मास्टर स्वतंत्र विचारों के, नैतिक और आदर्शवादी व्यक्ति थे । वे किसी भी जीव को बंधक बनाना पाप समझते थे

    • उदाहरण: जब उन्होंने पिंजरे में बंद मिट्ठू को देखा, तो उन्हें मानसिक यातना और आत्मग्लानि होने लगी । अपने सिद्धांतों के कारण उन्होंने कमरे को बंद करके पिंजरे का दरवाजा खोल दिया ताकि मिट्ठू आज़ाद हो सके । तोते के उड़ जाने पर भी उन्होंने ताई को भ्रम में रखना सही नहीं माना, बल्कि खुद दिन-रात एक करके नए तोते को रटाने का प्रयास करने लगे

6. कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है- ताई, जगन मास्टर, मिठू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।

  • उत्तर: यह शीर्षक सबसे अधिक ताई और नए तोते के बीच के संबंध के लिए सार्थक है

  • कारण: कहानी का मूल उद्देश्य ताई के जीवन के अकेलेपन को दिखाना है । जब असली मिट्ठू था, तब वह बोलकर ताई का अकेलापन दूर करता था । लेकिन अंत में जब नया (एवजी) तोता पिंजरे में आता है, तो वह ताई की पुकार पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता और मौन रहता है । ताई के जीवन में उनका सच्चा संवाद का साथी चला जाता है और दोनों के बीच केवल एक शून्य और 'संवादहीनता' बचती है

7. "अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।" ताई के बड़े से घर को सूना खंडहर क्यों कहा गया होगा?

  • उत्तर: किसी भी घर की जीवंतता वहाँ रहने वाले लोगों की चहल-पहल, बच्चों की हँसी और आपसी बातचीत से होती है। ताई का घर कभी पूत-परिवार, नौकरों और ढोर-पशुओं से भरा-पूरा था । परंतु अब सब लोग जा चुके थे और केवल ताई अकेली बची थीं । रख-रखाव के अभाव में और चारों तरफ पसरे डरावने सन्नाटे के कारण उस विशाल वैभवशाली घर को 'सूना खंडहर' कहा गया है

पाठ्यपुस्तक के अगले भाग 'मेरे प्रश्न' और 'भाषा से संवाद (व्याकरण की बात)' (पृष्ठ 53 से 58) के सभी प्रश्नों के सटीक हल नीचे दिए गए हैं:


## 1. मेरे प्रश्न (पृष्ठ 53-54)

यहाँ दिए गए उत्तरों के लिए सबसे उपयुक्त प्रश्न चुनना है:

  • उत्तर 1: ताई के अकेलेपन को मिट्ठू ने सहारा दिया।

    • सही प्रश्न: प्रश्न क : ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?

  • उत्तर 2: ताई के लौटने से पहले मिट्ठू उड़ गया था।

    • सही प्रश्न: प्रश्न ख : ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?

  • उत्तर 3: गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा।

    • सही प्रश्न: प्रश्न क : गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?

  • उत्तर 4: कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' जीवन के मौन का प्रतीक है।

    • सही प्रश्न: प्रश्न ख : शीर्षक 'संवादहीन' का क्या भावार्थ है?


पाठ्यपुस्तक के अगले खंड 'मेरे अनुभव मेरे विचार' (पृष्ठ 54) के सभी प्रश्नों के उत्तर आपके अनुभवों और तार्किक समझ के आधार पर नीचे दिए गए हैं:


1. "कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए भी न्यौते-बुलावे में जातीं, तो दस बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं..." ताई की तरह जब आप अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी वस्तु या व्यक्ति की चिंता आपको भीतर से कैसे परेशान करती है?

  • उत्तर: जब हम अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो स्वभाविक रूप से हमारे मन में असुरक्षा की भावना पैदा होती है। उदाहरण के लिए, यदि घर में कोई छोटा पालतू जानवर (जैसे बिल्ली या कुत्ता) हो या कोई बुजुर्ग अकेले हों, तो बाहर रहने पर भी हमारा ध्यान पूरी तरह वहीं लगा रहता है। मन में बार-बार विचार आते हैं कि "क्या उन्होंने खाना खाया होगा?", "क्या वे सुरक्षित होंगे?" या "कहीं घर का ताला खुला तो नहीं रह गया?" यह चिंता हमें भीतर से बेचैन रखती है और हम जल्द से जल्द घर लौटने का प्रयास करते हैं।

2. "आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है।" क्या आप मानते हैं कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं? अपने किसी अनुभव का वर्णन करते हुए लिखिए।

  • उत्तर: हाँ, मैं पूरी तरह मानता हूँ कि पशु-पक्षियों में भी मनुष्यों की तरह गहरी संवेदनाएँ, भावनाएँ और प्रेम होता है।

  • अनुभव: मेरे पड़ोस में एक कुत्ता है। जब भी उसके मालिक काम से घर लौटते हैं, वह खुशी से अपनी पूंछ हिलाने लगता है और उनके पैर चाटने लगता है। एक बार जब उसके मालिक बीमार हो गए थे, तो उसने दो दिनों तक ठीक से खाना नहीं खाया और चुपचाप उनके पलंग के पास बैठा रहा। इससे साफ पता चलता है कि पशु केवल भाषा नहीं बोलते, लेकिन वे हमारी हर भावना और दुख-सुख को बहुत गहराई से महसूस करते हैं।

3. "गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्टू की ही सूरत-शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए ताकि ताई को भ्रम में रखना जा सके..." ताई को भ्रम में रखना उचित था या नहीं? तर्क सहित अपने विचार लिखिए।

  • उत्तर: मेरे विचार से ताई को इस प्रकार भ्रम में रखना पूरी तरह अनुचित (गलत) था।

  • तर्क: * पहला कारण: किसी भी रिश्ते की नींव सच्चाई पर टिकी होती है। ताई का मिट्ठू के साथ एक आत्मीय और मानसिक जुड़ाव था, जिसे किसी दूसरे तोते से नहीं बदला जा सकता था।

    • दूसरा कारण: सच को छुपाने के लिए लाया गया वह दूसरा तोता ताई के अकेलेपन को दूर नहीं कर सका, बल्कि उसने 'संवादहीनता' को जन्म दिया। अगर ताई को सच बता दिया जाता, तो शायद उन्हें शुरू में दुख होता, लेकिन वे धीरे-धीरे यथार्थ को स्वीकार कर लेतीं। झूठ ने उनके मन में और अधिक निराशा भर दी।

4. "ताई सोच रही थीं कि उन्हें देखते ही मिट्ठू 'राम राम सीताराम' की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा।" क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने सोचा कुछ और, हुआ कुछ और? उस अनुभव को लिखिए।

  • उत्तर: हाँ, जीवन में कई बार ऐसा होता है जब हमारी उम्मीदें यथार्थ से बिल्कुल अलग होती हैं।

  • अनुभव: पिछले साल मेरे जन्मदिन पर मुझे लगा था कि मेरे सभी दोस्त व्यस्त होने के कारण मेरा जन्मदिन भूल गए हैं। मैं बहुत उदास था कि इस बार मेरा जन्मदिन बिल्कुल फीका रहेगा। लेकिन जैसे ही शाम को मैं अपने कमरे में गया, मेरे दोस्तों ने अचानक सामने आकर 'सरप्राइज पार्टी' दे दी। मैंने सोचा कुछ और था (कि सब भूल गए), लेकिन हुआ कुछ बहुत ही सुखद और अलग।

5. "मिट्ठू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की।" क्या प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में अपने आस-पास से उदाहरण भी दीजिए।

  • उत्तर: हाँ, लंबे समय तक कैद में रहने के कारण प्राणी अपनी स्वाभाविक स्वतंत्रता की आदत खो देते हैं और पिंजरे के वातावरण के ही आदी (अभ्यस्त) हो जाते हैं। इसे 'परतंत्रता का अभ्यास' भी कहा जा सकता है।

  • उदाहरण: हमारे आस-पास ऐसे कई लोग हैं जो पक्षियों को पालते हैं। कई बार यदि उनके पिंजरे का दरवाजा खुला भी छोड़ दिया जाए, तो भी वे पक्षी बाहर नहीं उड़ते। वे पिंजरे के भीतर मिलने वाले सुरक्षित भोजन और पानी पर इतने निर्भर हो जाते हैं कि उन्हें बाहर की खुली दुनिया अनजानी और डरावनी लगने लगती है। वे अपनी उड़ने की क्षमता और आज़ाद रहने का साहस खो बैठते हैं।

पाठ्यपुस्तक के खंड 'विधा से संवाद' (पृष्ठ 54-55) के अंतर्गत आने वाले दोनों भागों— 'कहानी का सौंदर्य' और 'कहानी का अंत' के सटीक हल नीचे दिए गए हैं:


## 1. कहानी का सौंदर्य (विशेष बिंदु और उदाहरण)

पाठ के आधार पर विशेष बिंदुओं के अन्य उदाहरण इस प्रकार हैं:

विशेष बिंदुअर्थपाठ से खोजा गया अन्य उदाहरण
चित्रात्मकता (दृश्य बिंब)शब्दों से जीवंत चित्र बनाना।"ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए वह बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास... पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे।"
संवादात्मकताबातचीत और संवादों का प्रयोग।

ताई: "मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?"


मिट्ठू: "कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!!"

पुनरुक्तिशब्दों की बार-बार आवृत्ति।"हर हर गंगे ! हर हर गंगे !!" या "मर जा! मर जा! मर जा!"
अतिशयोक्तिबात को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहना।"उन्हें देखते ही मिट्ठू 'राम राम सीताराम' की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा..."
लोकधर्मी भाषाग्रामीण और सहज बोलचाल की भाषा।"अपनी अकेली जान के लिए ताई दो जून का एक जून चूल्हा फूँक लेतीं..."
प्रश्नोत्तर शैलीप्रश्न-उत्तर के रूप में बात होना।ताई कहतीं, "भगवान ! कैसे नैया पार लगेगी?" और मिट्ठू उत्तर देता, "राम-राम कहो, सीताराम कहो।"

## 2. कहानी का अंत

(अ) 'संवादहीन' कहानी का अंत किस श्रेणी में आता है और क्यों?

मेरे अनुसार, इस कहानी का अंत 'यथार्थवादी अंत' (Realistic End) और 'दुखांत' (Tragic End) का एक अनूठा मिश्रण है।

  • कारण: यह अंत जीवन की कड़वी सच्चाई को दिखाता है। जगन मास्टर लाख कोशिशों के बाद भी एक आज़ाद हो चुके पक्षी की जगह दूसरे पक्षी को ताई का आत्मीय साथी नहीं बना पाते। अंत में ताई को अपने पुराने मिट्ठू की चहचहाहट की जगह पिंजरे में केवल मौन और 'संवादहीनता' मिलती है। यह बुजुर्गों के जीवन के उसी अकेलेपन को दोबारा स्थापित करता है जो समाज का एक वास्तविक और दुखद यथार्थ है।

(ब) कहानी का एक नया (वैकल्पिक) अंत

यदि मुझे इस कहानी का नया अंत लिखना हो, तो मैं इसे एक 'सुखांत और भावनात्मक' मोड़ देना चाहूँगा:

नया अंत: "...ताई अपने मिट्ठू को पुकार-पुकार कर थक गईं, लेकिन पिंजरे का नया तोता शांत बैठा रहा। ताई की आँखों से आंसू बहने लगे। तभी अचानक घर के बाहर लगे आम के पेड़ (अमराई) से एक जानी-पहचानी आवाज़ गूंजी— "हर हर गंगे! सीताराम बोल!!" 

ताई ने चौंककर बाहर देखा। वही पुराना मिट्ठू उड़कर आया और सीधे ताई के कंधे पर बैठ गया। वह आज़ाद तो हो गया था, लेकिन ताई के निस्वार्थ प्रेम की डोर उसे वापस खींच लाई थी। ताई ने मुस्कुराते हुए पिंजरे का दरवाज़ा हमेशा के लिए खोल दिया और नए तोते को भी आज़ाद कर दिया। अब बड़े घर का वह सूनापन हमेशा के लिए दूर हो गया था।"

## 1. विषयों से संवाद (पृष्ठ 56)

(1) मास्टराइन या 'जगन मास्टर की घरवाली' शब्द का प्रयोग क्यों किया गया है?

  • उत्तर: कहानीकार ने पात्र का कोई विशेष नाम न देकर उसे 'मास्टराइन' या 'जगन मास्टर की घरवाली' इसलिए कहा है क्योंकि ग्रामीण भारतीय समाज में महिलाओं को अक्सर उनके पति के पद, नाम या व्यवसाय से पहचान दी जाती है। यह संबोधन ग्रामीण परिवेश की इस सामाजिक वास्तविकता और सहजता को दर्शाता है।

(2) कुंभ-स्नान से जुड़े प्रश्न:

  • (क) कुंभ का आयोजन क्यों होता है और यह कब-कहाँ हुआ?

    • आयोजन का कारण: हिंदू मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान अमृत की बूंदें जिन चार पवित्र स्थानों (प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन) पर गिरी थीं, वहाँ कुंभ का आयोजन होता है। ऐसी मान्यता है कि यहाँ स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है।

    • पिछला आयोजन: पिछला महाकुंभ सन् 2013 में प्रयागराज में और पूर्ण कुंभ 2021 में हरिद्वार में आयोजित हुआ था।

    • अगला आयोजन: अगला महाकुंभ अगले वर्ष 2025 में प्रयागराज में आयोजित हुआ था।

  • (ख) ताई की कुंभ यात्रा का काल्पनिक वर्णन:

    • ताई गाँव के संगी-साथियों के साथ सुबह-सुबह तैयार होकर रेलवे स्टेशन गई होंगी। उन्होंने सूती पोटली में रास्ते के लिए घर की बनी पूड़ियाँ, अचार और पानी का लोटा रखा होगा। रेलगाड़ी के डिब्बे में भजन-कीर्तन करते हुए वे प्रयागराज पहुँची होंगी। वहाँ किसी धर्मशाला या तंबू के पंडाल में रुककर, कड़कती ठंड में गंगा के पावन तट पर श्रद्धापूर्वक डुबकी लगाई होगी और परलोक सुधारने की प्रार्थना की होगी।

  • (ग) हमारे क्षेत्र के मेले का वर्णन (पाँच ज्ञानेंद्रियों के आधार पर):

    • देखना (दृश्य): चारों तरफ रंग-बिरंगे हिंडोले, गुब्बारे, चमकती लाइटें और नए कपड़े पहने लोगों का हुजूम दिखाई देता है।

    • सुनना (ध्वनि): भोंपू की आवाज़, बच्चों की हँसी, झूलों की गड़गड़ाहट और "चाट-पकौड़े ले लो" की ऊँची आवाजें कानों में गूंजती हैं।

    • सूँघने (गंध): गरम-गरम कड़ाही में छनती हुई जलेबियों और समोसों की महक पूरे वातावरण में तैरती है।

    • स्वाद (रस): तीखे-चटपटे गोलगप्पों का पानी और मीठी मलाईदार कुल्फी का स्वाद मुँह में पानी ला देता है।

    • छूना (स्पर्श): मिट्टी के खिलौनों का खुरदरापन और भीड़ में एक-दूसरे से टकराते कंधों का अहसास मेले की जीवंतता बढ़ाता है।


## 2. सृजन (पृष्ठ 56-57)

(1) ताई के बहू-बेटों ने गाँव क्यों छोड़ा होगा?

  • उत्तर: ताई के बहू-बेटों ने बेहतर रोजगार, बच्चों की उच्च शिक्षा और आधुनिक सुख-सुविधाओं की तलाश में गाँव छोड़ा होगा। शहर जाते समय उन्होंने अपने उज्ज्वल भविष्य के सपने देखे होंगे, लेकिन साथ ही अपना पुश्तैनी घर और बूढ़ी माँ (ताई) को अकेला छोड़ते समय उनके मन में गहरी हिचकिचाहट और अपराधबोध भी रहा होगा। उन्होंने खुद को यह कहकर तसल्ली दी होगी कि "शहर में सेटल होकर वे ताई को भी बुला लेंगे।"

(2) यदि असली मिट्ठू वापस आ जाए तो क्या होगा? (आगे की कहानी):

  • उत्तर: "...एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके। ताई आँगन में बैठी थीं कि अचानक अमरूद के पेड़ से आवाज़ आई— "हर हर गंगे! सीताराम बोल!" ताई ने चौंककर देखा, असली मिट्ठू उड़कर सीधे उनके कंधे पर आ बैठा। पिंजरे में बंद नए (एवजी) तोते ने जब असली मिट्ठू को देखा, तो वह डरकर सहम गया। असली मिट्ठू ने पिंजरे के पास जाकर अपनी टेढ़ी गर्दन से उसे देखा और मानो अपनी भाषा में कहा— "तुम यहाँ क्या कर रहे हो भाई? यह कैद तुम्हारे लिए नहीं है।" ताई ने तुरंत उस नए तोते को पिंजरे से आज़ाद कर दिया। वह खुशी से उड़ गया और असली मिट्ठू अब आज़ाद रहकर भी रोज दोपहर को ताई से बातें करने आने लगा।"

(3) जगन मास्टर द्वारा बनाया गया तोते की खोज का विज्ञापन (Advertisement):

॥ खोया है ॥

ध्यान दें! ध्यान दें! कल सुबह जगन मास्टर के बगीचे से एक पहाड़ी तोता (मिट्ठू) उड़ गया है।

  • पहचान: गहरा हरा रंग, गले में लाल कंठी, और वह स्पष्ट आवाज़ में 'राम-राम', 'सीताराम' और 'हर हर गंगे' बोलता है।

  • नोट: यह तोता एक वृद्ध ताई के जीवन का एकमात्र सहारा है। जो भी सज्जन इसे ढूंढकर लाएंगे या इसके बारे में सही जानकारी देंगे, उन्हें उचित पुरस्कार दिया जाएगा।

  • संपर्क करें: जगन मास्टर, स्कूल के पास, मुख्य गाँव।

 

## 2. सृजन (पृष्ठ 56-57)

(1) ताई के बहू-बेटों ने गाँव क्यों छोड़ा होगा?

  • उत्तर: ताई के बहू-बेटों ने बेहतर रोजगार, बच्चों की उच्च शिक्षा और आधुनिक सुख-सुविधाओं की तलाश में गाँव छोड़ा होगा। शहर जाते समय उन्होंने अपने उज्ज्वल भविष्य के सपने देखे होंगे, लेकिन साथ ही अपना पुश्तैनी घर और बूढ़ी माँ (ताई) को अकेला छोड़ते समय उनके मन में गहरी हिचकिचाहट और अपराधबोध भी रहा होगा। उन्होंने खुद को यह कहकर तसल्ली दी होगी कि "शहर में सेटल होकर वे ताई को भी बुला लेंगे।"

(2) यदि असली मिट्ठू वापस आ जाए तो क्या होगा? (आगे की कहानी):

  • उत्तर: "...एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके। ताई आँगन में बैठी थीं कि अचानक अमरूद के पेड़ से आवाज़ आई— "हर हर गंगे! सीताराम बोल!" ताई ने चौंककर देखा, असली मिट्ठू उड़कर सीधे उनके कंधे पर आ बैठा। पिंजरे में बंद नए (एवजी) तोते ने जब असली मिट्ठू को देखा, तो वह डरकर सहम गया। असली मिट्ठू ने पिंजरे के पास जाकर अपनी टेढ़ी गर्दन से उसे देखा और मानो अपनी भाषा में कहा— "तुम यहाँ क्या कर रहे हो भाई? यह कैद तुम्हारे लिए नहीं है।" ताई ने तुरंत उस नए तोते को पिंजरे से आज़ाद कर दिया। वह खुशी से उड़ गया और असली मिट्ठू अब आज़ाद रहकर भी रोज दोपहर को ताई से बातें करने आने लगा।"

(3) जगन मास्टर द्वारा बनाया गया तोते की खोज का विज्ञापन (Advertisement):

॥ खोया है ॥

ध्यान दें! ध्यान दें! कल सुबह जगन मास्टर के बगीचे से एक पहाड़ी तोता (मिट्ठू) उड़ गया है।

  • पहचान: गहरा हरा रंग, गले में लाल कंठी, और वह स्पष्ट आवाज़ में 'राम-राम', 'सीताराम' और 'हर हर गंगे' बोलता है।

  • नोट: यह तोता एक वृद्ध ताई के जीवन का एकमात्र सहारा है। जो भी सज्जन इसे ढूंढकर लाएंगे या इसके बारे में सही जानकारी देंगे, उन्हें उचित पुरस्कार दिया जाएगा।

  • संपर्क करें: जगन मास्टर, स्कूल के पास, मुख्य गाँव।


 

पाठ्यपुस्तक के खंड 'भाषा से संवाद' (व्याकरण की बात) के सभी प्रश्नों के बिल्कुल सटीक और व्यवस्थित हल नीचे दिए गए हैं:


## (क) जीव-जंतुओं से जुड़े मुहावरे

पाठ में 'अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना' और 'तोते उड़ जाना' जैसे मुहावरों का प्रयोग हुआ है। ऐसे ही जीव-जंतुओं पर आधारित अन्य चार मुहावरे, उनके अर्थ और वाक्य प्रयोग निम्नलिखित हैं:

मुहावराअर्थवाक्य प्रयोग
1. भीगी बिल्ली बननाडर के मारे दुबक जाना"पिताजी को गुस्से में देखकर शरारती रोहन तुरंत भीगी बिल्ली बन गया।"
2. ऊँट के मुँह में जीराआवश्यकता से बहुत कम मिलना"पहलवान रमेश की भूख के आगे दो रोटियाँ तो ऊँट के मुँह में जीरा जैसी हैं।"
3. कोल्हू का बैल होनादिन-रात लगातार कठिन परिश्रम करना"गरीब रामू अपने परिवार का पेट पालने के लिए दिन-भर कोल्हू का बैल बना रहता है।"
4. गधे के सिर से सींग गायब होनाकिसी चीज़ का पूरी तरह से लापता हो जाना"पुलिस को आते देखकर चोर भीड़ में से ऐसे भागा मानो गधे के सिर से सींग गायब हो गए हों।"

## (ख) ध्वन्यात्मक शब्द (ध्वनि का आभास कराने वाले शब्द)

पक्षियों के उड़ने से उत्पन्न ध्वनि को 'फड़फड़ाहट' कहते हैं। इसी प्रकार के अन्य ध्वन्यात्मक शब्द और उनके वाक्य प्रयोग नीचे दिए गए हैं:

  • 1. भिनभिनाहट: * वाक्य: "कमरे में फैली गंदगी पर मक्खियों की भिनभिनाहट सुनकर बहुत अजीब लग रहा था।"

  • 2. चहचहाहट: * वाक्य: "सुबह पौ फटते ही बाग में पक्षियों की चहचहाहट गूँजने लगती है, जिससे मन प्रसन्न हो जाता है।"

  • 3. खटखटाहट: * वाक्य: "रात के सन्नाटे में अचानक मुख्य दरवाज़े पर खटखटाहट सुनकर सब सहम गए।"

  • 4. सनसनाहट: * वाक्य: "सर्दियों के मौसम में चलने वाली बर्फीली हवा की सनसनाहट बदन को कंपा देती है।"


## (ग) शब्द-युग्म (जोड़ों में लिखे जाने वाले शब्द)

पाठ में आए प्रमुख शब्द-युग्मों के अर्थ और उनके वाक्य प्रयोग निम्नलिखित हैं:

  • 1. दो जून का एक जून (समय का फेर/अत्यंत अभाव होना):

    • वाक्य: "अपनी अकेली जान के लिए ताई दो जून का एक जून चूल्हा फूँक लेती थीं।"

  • 2. व्रत-उपवास (धार्मिक नियम और नियमपूर्वक भूखा रहना):

    • वाक्य: "भारतीय संस्कृति में महिलाओं द्वारा व्रत-उपवास रखने की पुरानी परंपरा है।"

  • 3. चौका-चूल्हा (रसोई का काम):

    • वाक्य: "शहर जाने के बाद अब ताई को रोज़-रोज़ चौका-चूल्हा सँभालने में आलस आता था।"

  • 4. वक्त-बेवक्त (समय-असमय या ज़रूरत के समय):

    • वाक्य: "सच्चा पड़ोसी वही है जो हमारी वक्त-बेवक्त मदद के लिए खड़ा रहे।"

  • 5. नियम-सिद्धांत (आदर्श और कानून):

    • वाक्य: "जगन मास्टर अपने नियम-सिद्धांत के बहुत पक्के और आदर्शवादी व्यक्ति थे।"

  • 6. शादी-ब्याह (विवाह का मांगलिक उत्सव):

    • वाक्य: "पुराने दिनों में जमींदार साहब के घर होने वाले शादी-ब्याह की रौनक पूरे इलाके में प्रसिद्ध थी।"

  • 7. तीज-त्योहार (पर्व और उत्सव):

    • वाक्य: "गाँव के लोग आज भी सभी तीज-त्योहार मिल-जुलकर बड़े हर्षोल्लास से मनाते हैं।"


## (घ) खोजबीन शब्दों की (व्याकरणिक पहचान)पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 58 पर दिए गए गद्यांश के आधार पर शब्दों की व्याकरणिक खोज इस प्रकार है:

  1. 'तंग' का विपरीतार्थक (विलोम) शब्द: ढीली (धोती)

  2. एक वाक्यांश जो मुहावरा है: पंख तौलना (अपनी क्षमता का आकलन करना या उड़ने की तैयारी करना)

  3. एक क्रिया शब्द: उड़े / पुकारते रहे

  4. एक संज्ञा शब्द: जगन मास्टर / बाग / मिट्ठू

  5. एक सर्वनाम शब्द: वह / उनके

  6. एक विशेषण शब्द: ढीली (धोती) / दोनों (हाथों)

  7. एक कारक शब्द: हाथों से (करण कारक) / बाग में (अधिकरण कारक)

  8. एक कर्ता शब्द: जगन मास्टर / मिट्ठू


## (घ) खोजबीन शब्दों की (व्याकरणिक पहचान)

पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 58 पर दिए गए गद्यांश के आधार पर शब्दों की व्याकरणिक खोज इस प्रकार है:

  1. 'तंग' का विपरीतार्थक (विलोम) शब्द: ढीली (धोती)

  2. एक वाक्यांश जो मुहावरा है: पंख तौलना (अपनी क्षमता का आकलन करना या उड़ने की तैयारी करना)

  3. एक क्रिया शब्द: उड़े / पुकारते रहे

  4. एक संज्ञा शब्द: जगन मास्टर / बाग / मिट्ठू

  5. एक सर्वनाम शब्द: वह / उनके

  6. एक विशेषण शब्द: ढीली (धोती) / दोनों (हाथों)

  7. एक कारक शब्द: हाथों से (करण कारक) / बाग में (अधिकरण कारक)

  8. एक कर्ता शब्द: जगन मास्टर / मिट्ठू


पाठ्यपुस्तक के अगले भाग 'अर्थ के आधार पर वाक्य' (पृष्ठ 58-59) और उसके बाद दी गई 'गतिविधियों' के सभी प्रश्नों के सटीक और व्यवस्थित हल नीचे दिए गए हैं:


## 1. अर्थ के आधार पर वाक्य (पृष्ठ 58-59)

पाठ्यपुस्तक में दिए गए अर्थ के आधार पर वाक्यों के 8 भेदों को समझते हुए, कहानी से खोजे गए उनके उदाहरण और उनके प्रकार निम्नलिखित तालिका में दिए गए हैं:

क्र.सं.वाक्य का भेदपाठ से खोजा गया अन्य उदाहरण
1विधानवाचक वाक्य"वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था।"
2निषेधवाचक वाक्य"पेट की समस्या उनके लिए कभी समस्या नहीं रही।"
3प्रश्नवाचक वाक्य"जगन मास्टर के घर में नौकर-चाकर किस दम पर टिकते!"
4विस्मयादिबोधक वाक्य"देखते ही देखते क्या से क्या हो गया!"
5आज्ञावाचक वाक्य"मिठू, राम राम... सीताराम सीताराम... बोल!"
6इच्छावाचक वाक्य"जीते रहो बेटा, जुग जुग जिओ।"
7संदेहवाचक वाक्य"शायद उनकी बेवकूफी पर हँसता रहता हो।"
8संकेतवाचक वाक्य"लौटकर मिट्ठू को न पाने पर उनकी क्या दशा हो सकती है, इसका अनुमान वे भली-भाँति लगा सकते थे।"

## 2. गतिविधियाँ (पृष्ठ 59)

गतिविधि 2: पंखों की योजना (यदि आपको मिट्ठू की तरह उड़ने का मौका मिले...)

  • उत्तर: यदि मुझे मिट्ठू की तरह पंख फैलाकर उड़ने का मौका मिले, तो मैं सबसे पहले ऊँचे हिमालय पर्वतों और उत्तराखंड की उन वादियों में जाना चाहूँगा जहाँ से मिट्ठू (पहाड़ी तोता) आया था। मैं पिंजरों में बंद अन्य पक्षियों के पास जाकर उन्हें आज़ादी का महत्व समझाता और इंसानों की बस्ती से दूर घने जंगलों और फलों के बागों में आज़ाद घूमकर प्रकृति की सुंदरता का आनंद लेता।

गतिविधि 3: घर की महिलाओं की प्राथमिकताओं और रुचियों को समझना

  • उत्तर (एक विश्लेषण): हमारे परिवारों में अक्सर माताएँ या बुजुर्ग महिलाएँ अपनी पसंद-नापसंद को पीछे छोड़कर पूरे परिवार (बच्चों और पति) की पसंद का खाना रोज़ बनाती हैं। जब उनसे उनकी पसंद पूछी जाती है, तो वे अक्सर कहती हैं कि "जो सब खाएँगे, वही मैं भी खा लूँगी।" उनकी पसंद का विशेष भोजन (जैसे कोई विशेष मिठाई या पारंपरिक पकवान) महीने में केवल एक या दो बार किसी तीज-त्योहार या जन्मदिन के अवसर पर ही बनता है। यह बात ताई के उस यथार्थ को दर्शाती है कि महिलाएँ अक्सर स्वयं से ज़्यादा दूसरों की परवाह करती हैं।


## 3. मेरी पहेली (पृष्ठ 60)

दिए गए उत्तरों के आधार पर बनाई गई पहेलियाँ इस प्रकार हैं:

  1. उत्तर: तोता

    • पहेली: हरा-हरा है मेरा रंग, लाल कंठी है मेरे संग। मिर्ची खाना मुझको भाए, राम-राम जो सबको सुनाए। बताओ मैं कौन हूँ?

  2. उत्तर: पिंजरा

    • पहेली: लोहे की तारों का घर, उड़ने न दूँ मैं पंख पसार। कैद करूँ मैं नभ के वासी, सुंदर पर जो ढाए उदासी। बताओ मैं कौन हूँ?

  3. उत्तर: गंगा

    • पहेली: शिव की जटा से मेरी धारा, पाप धोए जग का सारा। जिसके तट पर कुंभ कहाए, देव नदी जो जग में पूजी जाए। बताओ मैं कौन हूँ?


## 4. भाषा संगम (पृष्ठ 60)

अपनी मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा (जैसे भोजपुरी या अन्य स्थानीय बोली) में तोते को क्या कहते हैं, उसे इस प्रकार लिख सकते हैं:

  • भोजपुरी / मैथिली / मगही: सुगा (Suga)

  • खड़ी बोली / हिंदी: तोता या सुआ


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