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पाठ्यपुस्तक 'गंगा-1' के अध्याय 'दो बैलों की कथा'

 

पाठ्यपुस्तक 'गंगा-1' के अध्याय 'दो बैलों की कथा' 


अभ्यास: मेरे उत्तर मेरे तर्क

1. कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?

  • सही उत्तर: (ख) एकता और सहयोग

  • तर्क: पूरी कहानी में हीरा और मोती एक-दूसरे का साथ कभी नहीं छोड़ते। चाहे सांड से लड़ना हो या काँजीहौस से भागना, वे मिलकर योजना बनाते हैं और संकट के समय एक-दूसरे के लिए वापस लौट आते हैं।

2. हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?

  • सही उत्तर: (ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।

  • तर्क: जब झूरी ने उन्हें अपने साले गया के साथ भेजा, तो बैलों को लगा कि उनके मालिक ने उन्हें बेच दिया है। वे झूरी से बहुत प्रेम करते थे, इसलिए उन्हें यह परायापन और 'बिक जाना' अपमानजनक लगा।

3. बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?

  • सही उत्तर: (घ) अपनापन पाने के लिए

  • तर्क: गया के घर में उन्हें न तो वह प्रेम मिला जो झूरी के पास था और न ही उचित भोजन। वे अपने पुराने घर और मालिक (झूरी) के प्रति लगाव और सुरक्षा की भावना के कारण वापस लौटना चाहते थे।

4. गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है?

  • सही उत्तर: (घ) अन्याय की रक्षा (अन्याय का विरोध)

  • तर्क: जब गया ने उन्हें बिना कारण डंडे से पीटा, तो मोती का खून खौल उठा। यह इस मानवीय स्वभाव को दर्शाता है कि व्यक्ति को अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठानी चाहिए और अत्याचार चुपचाप नहीं सहना चाहिए।

5. कहानी में बैलों की 'मूक-भाषा' का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया?

  • सही उत्तर: (ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए

  • तर्क: प्रेमचंद ने बैलों को केवल पशु नहीं, बल्कि संवेदनशील और बुद्धिमान प्राणियों के रूप में दिखाया है। मूक-भाषा के माध्यम से वे यह दर्शाना चाहते थे कि पशुओं में भी मनुष्यों की तरह भावनाएँ, विचार और एक-दूसरे के प्रति संवेदना होती है।

6. 'दो बैलों की कथा' को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?

  • सही उत्तर: (घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के

  • तर्क: जिस प्रकार हीरा और मोती बार-बार बंधन में पड़ते हैं, यातनाएं सहते हैं लेकिन अपनी आज़ादी के लिए लड़ना नहीं छोड़ते, ठीक उसी प्रकार भारतीय जनता ने भी अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त होने के लिए कड़ा संघर्ष किया था।


  • मेरी समझ मेरे विचार (हल)


  • 1. "दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।" जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?

    • उत्तर: हीरा और मोती अपने पुराने मालिक झूरी से बहुत प्रेम करते थे। जब उन्हें गया के साथ भेजा गया, तो उन्हें लगा कि झूरी ने उन्हें बेच दिया है। इस 'बेचे जाने' की भावना ने उन्हें आहत किया। गया का व्यवहार भी रूखा था और वह उन्हें प्रेम देने के बजाय डंडे से मारता था। इसलिए, विरोध स्वरूप और अपने पुराने घर के प्रति वफादारी के कारण उन्होंने काम करने से इनकार कर दिया।

    2. "गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी।" बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है। कैसे?

    • उत्तर: पशुओं का रास्ता भटककर वापस आना सामान्य हो सकता है, लेकिन हीरा-मोती का वापस आना उनके अगाध प्रेम और स्वाभिमान का प्रतीक था। यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि:

      • यह इंसानों और पशुओं के बीच के भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाती थी।

      • बैलों ने पराए घर के अपमानजनक जीवन के बजाय संघर्ष करके अपने 'घर' लौटने को चुना।

      • झूरी और गाँव के बच्चों के मन में उनके प्रति सम्मान बढ़ गया था।

    3. "मोती ने मूक-भाषा में कहा- अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!" 'कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है' इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।

    • उत्तर: कहानी में जब गया बैलों पर अत्याचार करता है और उन्हें काँजीहौस में भूखा रखा जाता है, तब हीरा-मोती को अहसास होता है कि चुपचाप सहने से कष्ट और बढ़ेंगे।

      • उदाहरण: काँजीहौस की दीवार तोड़ना और सांड से मुकाबला करना। यदि वे संघर्ष नहीं करते, तो वे वहीं मर जाते या हमेशा के लिए गुलाम बन जाते। यह सिद्ध करता है कि अपनी आज़ादी और सम्मान के लिए संघर्ष करना अनिवार्य है।

    4. हीरा एवं मोती 'स्वतंत्रता' और 'अपनापन' दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।

    • उत्तर: हीरा और मोती 'अपनापन' की भावना से अधिक प्रेरित थे।

      • कारण: हालाँकि उन्हें आज़ादी प्रिय थी, लेकिन उनकी आज़ादी का केंद्र झूरी का घर था। वे जंगल में भी आज़ाद रह सकते थे, लेकिन वे बार-बार झूरी के पास ही लौटे क्योंकि वहाँ उन्हें प्रेम और अपनापन मिलता था। उनके लिए आज़ादी का अर्थ वही था जहाँ उनका सम्मान और स्नेह हो।

    5. "बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।" 'अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है'- क्या आप इस कथन से सहमत हैं?

    • उत्तर: हाँ, मैं इस कथन से पूरी तरह सहमत हूँ। यदि हम अत्याचार सहते रहते हैं, तो अत्याचारी का मनोबल बढ़ता है। हीरा और मोती ने गया के यहाँ काम न करके और काँजीहौस की दीवार तोड़कर यह संदेश दिया कि अन्याय के विरुद्ध खड़ा होना ही सही मार्ग है। चुप रहना अत्याचारी को और अधिक शोषण करने का लाइसेंस देने जैसा है।

    6. हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। कहानी की किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है?

    • उत्तर: निम्नलिखित घटनाओं से उनकी गहरी मित्रता सिद्ध होती है:

      1. सांड से लड़ाई: दोनों ने मिलकर योजना बनाई कि एक आगे से वार करेगा और दूसरा पीछे से।

      2. मटर के खेत में: जब मोती पकड़ा गया, तो हीरा उसे छोड़कर भागा नहीं, बल्कि खुद भी पकड़ा गया।

      3. काँजीहौस की घटना: हीरा की रस्सी नहीं टूटी, तो मोती ने भागने का मौका होने के बावजूद हीरा के साथ ही रहना चुना।

    7. कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।

    • तुलना:

      • मालकिन (गया की पत्नी): वह बैलों के प्रति निष्ठुर और कठोर थी। वह उन्हें बोझ समझती थी और उन्हें रूखा-सूखा भोजन देती थी। उसका व्यवहार स्वार्थ और क्रोध से भरा था।

      • छोटी लड़की: वह दया और करुणा की प्रतिमूर्ति थी। वह बैलों का दुःख समझती थी क्योंकि उसने खुद अपनी माँ को खोया था (अनाथ जैसा महसूस करती थी)। वह चोरी-छिपे उन्हें रोटियाँ खिलाती थी और अंत में उन्हें आज़ाद करने के लिए रस्सियाँ भी खोल दीं


  • मेरी कल्पना मेरे अनुमान (हल)
    • 1. "उसने उनके माथे सहलाए और बोली- खोले देती हूँ। चुपके से भाग जाओ..." यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?

      • उत्तर: यदि मैं वह छोटी लड़की होता/होती, तो मैं भी वही करता जो उस लड़की ने किया, क्योंकि दया और करुणा सबसे बड़े गुण हैं। इसके अलावा मैं निम्नलिखित प्रयास भी करता/करती:

        • मैं उन्हें न केवल आज़ाद करता, बल्कि रात के अंधेरे में उन्हें गाँव की सीमा तक छोड़ने की कोशिश करता ताकि कोई उन्हें तुरंत पकड़ न ले।

        • मैं उनके साथ थोड़ा और भोजन या गुड़ रख देता ताकि रास्ते में उन्हें भूख न लगे।

        • मैं अपने घर वालों को समझाने की कोशिश करता कि पशु भी प्रेम के भूखे होते हैं और उनके साथ क्रूरता करना गलत है।

      2. "दोनों गधे अभी तक ज्यों-के-त्यों खड़े थे।" भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? इस वाक्य के संबंध में कहानी और अपने अनुभवों से उदाहरण लेते हुए अपने विचार लिखिए।

        • उत्तर: हाँ, मैं इस कथन से पूरी तरह सहमत हूँ। अक्सर हम अपनी परिस्थितियों से इतने डर जाते हैं कि जब आज़ाद होने या आगे बढ़ने का मौका मिलता है, तब भी हम कदम नहीं उठा पाते।

        • कहानी का उदाहरण: काँजीहौस की दीवार टूटने के बाद सभी जानवर भाग गए, लेकिन गधे वहीं खड़े रहे। उन्हें डर था कि अगर वे भागे और पकड़े गए तो क्या होगा? उनका यही 'भय' उनकी आज़ादी में बाधा बन गया।
    • निजी अनुभव/विचार: कई बार कक्षा में शिक्षक से सवाल पूछने का अवसर होता है, लेकिन 'गलत होने के डर' या 'संकोच' के कारण हम चुप रह जाते हैं। यह संकोच हमें सीखने के अवसर से दूर रखता है। इसी तरह, समाज में बदलाव का मौका मिलने पर भी कई लोग पुराने ढर्रे पर ही चलते रहते हैं क्योंकि वे अज्ञात भविष्य से डरते हैं।

    • मेरे अनुभव मेरे विचार (हल)

    • 1. "दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है..." क्या आप इस बात से सहमत हैं?

      • उत्तर: हाँ, मैं इस बात से काफी हद तक सहमत हूँ। सच्ची दोस्ती में औपचारिकता (formality) नहीं होती। जब हम अपने दोस्तों के साथ हंसी-मजाक, छीना-झपटी या थोड़ा 'धौल-धप्पा' (मजाकिया लड़ाई) करते हैं, तो यह दर्शाता है कि हम एक-दूसरे के साथ बहुत सहज (comfortable) हैं।

      • तर्क: बिना हंसी-मजाक के दोस्ती केवल जान-पहचान जैसी लगती है। संघर्ष और शरारतें ही रिश्तों को गहराई और यादें देती हैं, जैसा कि हीरा और मोती के बीच सींग मिलाने और एक-दूसरे को ठेलने के दौरान दिखता था।

      2. "गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए" (हीरा) बनाम "बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे" (मोती)। आप किसके साथ हैं और क्यों?

      • उत्तर: मैं हीरा के विचार के साथ हूँ।

      • तर्क: हीरा का विचार भारतीय मूल्यों और 'युद्ध धर्म' को दर्शाता है। किसी असहाय या हार मान चुके शत्रु पर प्रहार करना वीरता नहीं, कायरता है। नैतिकता हमें सिखाती है कि जब दुश्मन निहत्था या संकट में हो, तो उसे क्षमा करना या छोड़ देना ही मानवता है। मोती का विचार केवल तात्कालिक क्रोध को शांत करता है, लेकिन हीरा का विचार चरित्र की महानता को दर्शाता है।

      3. "हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे। आज तुम विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?" क्या आपने कभी किसी विपत्ति का सामना मित्र के साथ मिलकर किया है

      • उत्तर (एक उदाहरण): हाँ, मुझे याद है जब एक बार हमारे स्कूल के प्रोजेक्ट की फाइल आखिरी समय पर खराब हो गई थी। हम दोनों बहुत डरे हुए थे, लेकिन मेरे मित्र ने मेरा साथ नहीं छोड़ा। हम पूरी रात साथ जागे और मिलकर उसे फिर से तैयार किया।
        • सीख: अकेले डरना आसान है, लेकिन साथ मिलकर लड़ने से बड़ी से बड़ी चुनौती छोटी लगने लगती है। हीरा और मोती ने भी यही सिखाया कि जब मोती मटर के खेत में फँसा, तो हीरा सुरक्षित होने के बावजूद वापस आ गया क्योंकि सच्ची मित्रता साथ निभाने में है, अकेले बचने में नहीं।
      • 1. कहानी की पड़ताल (कहानी लेखन के मुख्य बिंदु)

        यहाँ आपको स्वयं एक कहानी का ढाँचा तैयार करना है। उदाहरण के लिए, हम 'दो बैलों की कथा' के आधार पर ही इसे समझ सकते हैं या एक नई कहानी सोच सकते हैं। यदि आप अपनी कहानी लिखना चाहते हैं, तो इन बिंदुओं को ऐसे भरें:

        • शीर्षक: (उदाहरण: सच्ची मित्रता या आज़ादी का मूल्य)

        • लेखक: (आपका नाम या प्रेमचंद)

        • विषय: पशुओं का अपने मालिक के प्रति प्रेम और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष।

        • चरित्र/पात्र: हीरा, मोती, झूरी, गया, छोटी लड़की।

        • परिवेश/देश-काल: भारतीय गाँव, ब्रिटिश काल का समय (गुलामी का दौर)।

        • मुख्य विचार: एकता में शक्ति होती है और अपनी आज़ादी के लिए लड़ना ज़रूरी है।

        • परिणाम: अंत में हीरा और मोती तमाम बाधाओं को पार कर अपने घर वापस पहुँच जाते हैं।


        2. कहानी का सौंदर्य (तालिका पूर्ण करना)

        कहानी में लेखक ने कई साहित्यिक विशेषताओं का प्रयोग किया है। पेज 19 पर दी गई तालिका के लिए 'उदाहरण 2' यहाँ दिए गए हैं:


        विशेषताविशेषता का अर्थउदाहरण 2 (कहानी से)
        चित्रात्मक भाषाशब्दों से चित्र बनाना"सहसा घर का द्वार खुला और वही लड़की निकली।"
        संवादात्मकतापात्रों के बीच बातचीत"मोती ने मूक-भाषा में कहा- अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!"
        विरोधाभासदो विपरीत बातें एक साथ"झूरी बैलों को देखकर स्नेह से गद्गद हो गया। झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी।"
        व्यंग्यमजाक या कटाक्ष द्वारा कमी बताना"अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते तो शायद सभ्य कहलाने लगते।"
        संघर्षदो शक्तियों का टकराना"साँड़ पूरा हाथी है... पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके।" (बैल बनाम साँड़)
        अतिशयोक्तिबात को बहुत बढ़ाकर कहना"झूरी इन्हें फूल की छड़ी से भी न छूता था। उसकी टिटकार पर दोनों उड़ने लगते थे।"
        संदेह/उलझननिर्णय न ले पाना"समझ ही में न आता था, यह कैसा स्वामी है? (काँजीहौस में)"

        कहानी की रचना: संकेत बिंदु

        1. गधे के माध्यम से मानवीय स्वभाव का परिचय: कहानी की शुरुआत में लेखक ने गधे को सबसे बुद्धिमान (ऋषि-मुनियों जैसा) बताकर एक गहरा संकेत दिया है। यह संकेत देता है कि कहानी सीधेपन और सहनशीलता बनाम संघर्ष के विषय पर आधारित होगी।

        "गधा एक ऐसा प्राणी है, जिसे हम बेवकूफ कहते हैं... उसके चेहरे पर एक स्थायी विषाद छाया रहता है।"

        2. मुख्य पात्रों (हीरा-मोती) का परिचय: लेखक ने प्रारंभ में ही दोनों बैलों की शारीरिक बनावट और उनके स्वभाव को स्पष्ट कर दिया है, जिससे पाठक का उनसे जुड़ाव हो जाता है।

        "झूरी काछी के दो बैल थे- हीरा और मोती। दोनों पछाईं जाति के थे- देखने में सुंदर, काम में चौकस, डील में ऊँचे।"

        3. मूक-भाषा और गहरी मित्रता का संकेत: कहानी के शुरू में ही यह बताया गया है कि दोनों बैल आपस में बात करते हैं। यह संकेत देता है कि यह कहानी केवल पशुओं की नहीं, बल्कि उनकी संवेदनाओं और दोस्ती की है।

        "दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मूक-भाषा में विचार-विनिमय करते थे।"

        4. तत्कालीन समाज और गुलामी का संकेत: हीरा और मोती का झूरी के घर से दूर भेजा जाना और उनके द्वारा विद्रोह करना, उस समय के स्वतंत्रता आंदोलन और पराधीन भारत की स्थिति का सांकेतिक परिचय देता है।

        "गया ने उन्हें हल में जोता, पर दोनों ने पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।"

        5. स्त्री के प्रति सम्मान का संकेत: कहानी के प्रारंभिक संवादों में ही यह संकेत मिलता है कि यह कहानी नैतिक मूल्यों पर आधारित है।

        "लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूले जाते हो।"

        कहानी के वाक्यों का स्वतंत्रता आंदोलन से मिलान

        कहानी के वाक्यस्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव
        1. "जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ।"(6) स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए।
        2. "मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा।"(5) स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य।
        3. "हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता।"(4) दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी।
        4. "दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था।"(2) भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया।
        5. "इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे।"(1) भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आजादी की प्रेरणा जगी।
        6. "साँड़ पूरा हाथी है... पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके।"(3) ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया।

        पशुओं के लिए कानून (प्रश्नों के उत्तर)

        1. बैलों का काँजीहौस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है। कैसे?

        • उत्तर: * अन्याय: बैलों को बिना किसी कसूर के, केवल भूख मिटाने के लिए मटर खाने के कारण कैद किया गया और वहाँ उन्हें खाना-पानी भी नहीं दिया गया। यह पशु क्रूरता और अन्याय है।

          • न्याय (कानूनी दृष्टि से): उस समय के कानून के अनुसार, यदि कोई पशु किसी दूसरे के खेत का नुकसान करता है, तो उसे 'काँजीहौस' में बंद करने का नियम था। अतः कानूनी प्रक्रिया के अनुसार यह न्याय था।

        2. यदि आपको अवसर मिले तो आप बैलों की ओर से कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?

        • उत्तर: मैं बैलों के लिए निम्नलिखित अधिकारों की माँग करूँगा/करूँगी:

          • भोजन और पानी का अधिकार: कैद में भी पशुओं को उचित आहार मिलना अनिवार्य हो।

          • यातना से मुक्ति: किसी भी पशु को शारीरिक रूप से प्रताड़ित (डंडे मारना) न किया जाए।

          • मुकदमे की सुनवाई: पशु के मालिक को सूचना दी जाए और उसे अपनी बात रखने का मौका मिले।

          • स्वच्छ आवास: उन्हें गंदी या कीचड़ वाली जगह पर न रखा जाए।

      • सेवा में, थानाध्यक्ष महोदय, सिविल लाइंस थाना, बनारस।

        विषय: हमारे साथ हुए अन्याय और क्रूरता के संबंध में शिकायत।

        महोदय,

        सविनय निवेदन है कि हमारा नाम हीरा और मोती है। हम झूरी काछी के बैल हैं। हम इस पत्र के माध्यम से अपने साथ हुए घोर अन्याय की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।

        हमारे साथ निम्नलिखित अन्याय हुए हैं:

        1. धोखे से बेचना: हमारे मालिक ने हमें बिना बताए अपने साले गया के साथ भेज दिया, जिससे हमें लगा कि हमें बेच दिया गया है। यह हमारे विश्वास के साथ खिलवाड़ है।

        2. शारीरिक प्रताड़ना: गया के घर में हमें दिन-भर हल में जोता गया और विरोध करने पर डंडों से बेरहमी से पीटा गया। हमें खाने के लिए केवल रूखा-सूखा भूसा दिया गया, जबकि वह अपने बैलों को खली और चूनी खिलाता था।

        3. अमानवीय कैद (काँजीहौस): हमें काँजीहौस में बंद किया गया जहाँ कई दिनों तक हमें एक तिनका भी खाने को नहीं मिला। वहाँ की स्थिति अत्यंत नारकीय थी और हमें नीलाम करने की कोशिश भी की गई।

        महोदय, हमारे साथ हुआ यह व्यवहार पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के विरुद्ध है। हम केवल अपने असली घर (झूरी के पास) सुरक्षित रहना चाहते हैं। अतः आपसे प्रार्थना है कि इस मामले की जाँच करें और हमें न्याय दिलाएँ ताकि भविष्य में हमारे साथ ऐसी क्रूरता न हो।

        प्रार्थी, हीरा और मोती (झूरी काछी के बैल)


      •  

        हमारी धरोहर और संस्कृति (हल)

        1. "वह अपना धर्म छोड़ दे लेकिन हम अपना धर्म क्यों छोड़ें!" कहानी के अनुसार हीरा और मोती सदैव ध्यान रखते थे कि कौन-से कार्य करने योग्य हैं और कौन-से नहीं। वे कौन-कौन से कार्य कभी नहीं करते थे?

        • उत्तर: हीरा और मोती पशु होते हुए भी नैतिक मूल्यों का पालन करते थे। वे निम्नलिखित कार्य कभी नहीं करते थे:

          • असहाय पर प्रहार: वे गिरे हुए या हार मान चुके शत्रु (जैसे सांड) पर सींग नहीं चलाते थे।

          • नारी का अपमान: वे 'औरत जात' पर सींग चलाना पाप समझते थे, चाहे वह उन्हें मारने वाली मालकिन ही क्यों न हो।

          • स्वामी से गद्दारी: वे अपने मालिक झूरी के प्रति हमेशा वफादार रहे और कभी उसे नुकसान पहुँचाने की बात नहीं सोची।

          • मित्र का त्याग: विपत्ति के समय वे कभी एक-दूसरे को अकेला छोड़कर नहीं भागते थे।

        2. "गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।" "लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूले जाते हो।" हीरा के ये कथन किन भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं?

        • उत्तर: हीरा के ये कथन गहरे भारतीय जीवन मूल्यों की ओर संकेत करते हैं:

          • नारी का सम्मान: 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते' की भावना को दर्शाते हुए महिलाओं के प्रति आदर और सुरक्षा का भाव रखना।

          • युद्ध की नैतिकता (धर्मयुद्ध): शत्रु यदि निहत्था हो, शरण में हो या गिर पड़ा हो, तो उस पर वार न करना वीरता का लक्षण माना जाता है।

          • क्षमा और दया: शक्ति होने के बावजूद निर्बल पर प्रहार न करना और दया दिखाना महानता का प्रतीक है।

        3. "दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता"

        (क) कृषि के अन्य पारंपरिक और आधुनिक उपकरणों तथा उनके उपयोग के विषय में पता लगाइए और लिखिए।

        श्रेणीउपकरण के नामउपयोग
        पारंपरिकहल, कुदाल, हँसिया, खुरपी, फावड़ा, रहटबैलों द्वारा जुताई, हाथों से निराई-गुड़ाई और कुएँ से पानी निकालना।
        आधुनिकट्रैक्टर, कल्टीवेटर, हार्वेस्टर, रोटावेटर, कम्बाइनमशीनों द्वारा तीव्र जुताई, बुवाई और फसल की कटाई।

        (ख) भारतीय गाँवों एवं शहरों में भी बैल किस-किस काम में सहायक होते हैं?

        • उत्तर: बैल भारतीय जनजीवन का आधार रहे हैं:
          • गाँवों में: वे खेती (जुताई), अनाज की मड़ाई (दँवरी), कोल्हू चलाने और बैलगाड़ी के माध्यम से सामान ढोने के काम आते हैं।
          • शहरों में: पुराने समय में शहरों में भी माल ढोने (जैसे लकड़ी, अनाज की बोरियाँ) के लिए बैलगाड़ियों का प्रयोग होता था।
        • सांस्कृतिक कार्य: मेलों, त्यौहारों (जैसे पोला या पोंगल) और धार्मिक यात्राओं में बैलों का उपयोग गौरव का विषय माना जाता है।

    • अलग-अलग और साथ-साथ (हल)

      1. कहानी के आधार पर हीरा और मोती की विशेषताएँ लिखिए।

      • हीरा की विशेषताएँ: वह स्वभाव से शांत, गंभीर और बहुत अधिक सहनशील था। वह नैतिकता का पालन करने वाला और धैर्यवान बैल था। संकट के समय वह सूझबूझ से काम लेता था।

      • मोती की विशेषताएँ: वह थोड़ा गुस्सैल और विद्रोही स्वभाव का था। वह अन्याय को चुपचाप सहने के बजाय उसका ईंट का जवाब पत्थर से देने में विश्वास रखता था। वह साहसी था और अपने मित्र के प्रति अत्यंत वफादार था।

      2. हीरा और मोती की विशेषताएँ कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ अलग हैं, किंतु उनकी भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को पूरा करती हैं। कैसे?

      • उत्तर: हीरा और मोती एक-दूसरे के पूरक थे। जहाँ मोती आवेश में आकर आपा खो देता था, वहाँ हीरा अपनी शांति और धैर्य से उसे संभाल लेता था। वहीं, जहाँ हीरा चुपचाप कष्ट सहता रहता, वहाँ मोती का विद्रोह उन्हें संघर्ष करने की प्रेरणा देता था। जैसे- सांड से लड़ते समय हीरा ने योजना बनाई और मोती ने अपने साहस से उसे अंजाम दिया। उनकी यह भिन्नता ही उनकी सफलता का आधार बनी।

      3. आपकी कक्षा में भी कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी हैं। आप उनसे अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं?

      • उत्तर: मैं चाहता हूँ कि मेरे सहपाठी मेरी भिन्नताओं का सम्मान करें। यदि मैं किसी विषय में कमजोर हूँ, तो वे मेरा मज़ाक उड़ाने के बजाय 'हीरा-मोती' की तरह मेरा साथ दें। मैं उनसे सहयोग, सहानुभूति और मित्रतापूर्ण व्यवहार की अपेक्षा करता हूँ, जहाँ हम पढ़ाई और खेल में एक-दूसरे की ताकत बनें।

      4. हीरा और मोती किस प्रकार आपस में बातें किया करते होंगे? अनुमान और कल्पना से बताइए।

      • उत्तर: हीरा और मोती 'मूक-भाषा' में संवाद करते थे। वे संभवतः एक-दूसरे को सूंघकर, आँखों के संकेतों से या फिर शरीर को रगड़कर अपनी भावनाएँ व्यक्त करते होंगे। जब वे साथ खड़े होते, तो उनकी आँखों की चमक या गर्दन का झुकाव ही उनके सुख-दुःख और अगली योजना को बयां कर देता होगा।

      5. आप भी अनेक अवसरों पर बिना शब्दों का उच्चारण किए संवाद करते हैं। कब-कब? कहाँ-कहाँ?

      • उत्तर: हम दैनिक जीवन में कई बार बिना बोले संवाद करते हैं:

        • कक्षा में: शिक्षक की ओर देखकर सिर हिलाना या उंगली उठाकर पानी पीने की अनुमति माँगना।

        • खेल के मैदान में: क्रिकेट खेलते समय रन लेने के लिए आँखों ही आँखों में इशारा करना।

        • घर पर: उदास होने पर बिना कुछ कहे माँ का चेहरा देखकर उनकी चिंता समझ जाना या अपनी बात कह देना।


    • मार्ग खोजेंगे कैसे? (हल)

      1. हीरा-मोती अपने घर के मार्ग से भटक गए थे। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप रास्ता भूल गए या भटक गए? तब आपने अपने मार्ग का पता कैसे लगाया था?

      • उत्तर: (विद्यार्थी अपने अनुभव के आधार पर लिखे )

      • उदाहरण: हाँ, एक बार मैं मेले में अपने माता-पिता से अलग हो गया था और रास्ता भटक गया था। तब मैंने घबराने के बजाय पास के एक पुलिस सहायता केंद्र (Police Help Desk) का रुख किया। मैंने उन्हें अपने घर का फोन नंबर और पता बताया, जिसके बाद उन्होंने मुझे मेरे परिवार से मिला दिया। यदि आप शहर में भटकें, तो किसी बड़ी दुकान के बोर्ड पर लिखा पता पढ़कर भी अपनी लोकेशन का अंदाजा लगा सकते हैं।

      2. यदि कोई व्यक्ति भटक जाए तो उसे क्या करना चाहिए कि वह सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुँच जाए?

      • उत्तर: रास्ता भटकने पर व्यक्ति को निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:

        • ऑनलाइन मानचित्र (Google Maps): अपने स्मार्टफोन का उपयोग करके वर्तमान स्थान और गंतव्य का रास्ता देखें।

        • पुलिस या सरकारी भवन: किसी पुलिसकर्मी से पूछें या पास के पुलिस स्टेशन/डाकघर जाकर मदद लें।

        • स्थानीय लोग: दुकानों के बोर्ड पर लिखे पते देखें या किसी जिम्मेदार नागरिक (जैसे- दुकानदार या वर्दीधारी व्यक्ति) से रास्ता पूछें।

        • पहचान चिह्न (Landmarks): स्कूल, मंदिर, अस्पताल या किसी बड़े चौराहे जैसे प्रसिद्ध स्थानों को खोजें जो सही दिशा बताने में मदद करें।

        • फोन का उपयोग: अपने परिजनों को कॉल करें और अपनी लाइव लोकेशन (Live Location) साझा करें।

      3. आपके विद्यालय में आपदा की स्थिति में निकासी का मार्ग (Evacuation Map) दर्शाने वाला मानचित्र अवश्य होगा। उसे ध्यानपूर्वक देखिए और पता लगाइए कि आपदा की स्थिति में आपकी कक्षा के सबसे निकट और सुरक्षित कौन-सा मार्ग है।

      • उत्तर: (यह गतिविधि आपको स्वयं स्कूल में करनी है)

      • कैसे करें: अपनी कक्षा के बाहर या कॉरिडोर में लगे 'Emergency Exit Plan' को देखें। उसमें हरे रंग के तीरों (Arrows) का पीछा करें जो आपको खुले मैदान या असेंबली पॉइंट (Assembly Point) तक ले जाते हैं। आमतौर पर सीढ़ियों के पास और मुख्य द्वार की ओर जाने वाले रास्ते ही सबसे सुरक्षित निकासी मार्ग होते हैं।

      सृजन

      1. हीरा और मोती की दैनंदिनी (डायरी)

      दिनांक: 20 अप्रैल, 2026 समय: रात्रि 9:00 बजे

      आज का दिन हमारे जीवन का सबसे काला दिन था। हमें काँजीहौस के इस गंदे और संकरे बाड़े में बंद कर दिया गया है। यहाँ न तो झूरी का वह प्यार है और न ही खाने के लिए सूखा भूसा। चारों तरफ बस भूख और अपमान का सन्नाटा है। पेट भूख से जल रहा है और देह थकावट से चूर है। यहाँ हमारे जैसे और भी कई अभागे जानवर हैं, जो मुर्दों की तरह पड़े हैं। लेकिन हम हार नहीं मानेंगे। मेरा मन कहता है कि झूरी हमें खोजने जरूर आएगा। अगर वह नहीं आया, तो हमें खुद यहाँ से निकलने का रास्ता बनाना होगा। आज़ादी की चाह अभी भी हमारे सीने में ज़िंदा है।

      - मोती


      2. आज के समाचार (रिपोर्ट)

      बहादुर बैलों ने तोड़ी बेड़ियाँ: काँजीहौस से दर्जनों जानवर फरार

      स्थानीय संवाददाता, बनारस: कल देर रात स्थानीय काँजीहौस में एक अभूतपूर्व घटना घटी। बाड़े में बंद दो शक्तिशाली पछाईं बैलों ने अपनी वीरता का परिचय देते हुए बाड़े की कच्ची दीवार को गिरा दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बैलों ने अपने सींगों के प्रहार से दीवार का एक बड़ा हिस्सा ढहा दिया, जिसके बाद वहाँ कैद भैंसें, घोड़े और बकरियाँ आज़ाद होकर भाग निकले। इस घटना ने इलाके के पशुपालकों और प्रशासन को हैरान कर दिया है। हालाँकि, दोनों मुख्य अपराधी बैल (हीरा-मोती) अभी भी पुलिस और दढ़ियल कसाई की पकड़ से बाहर बताए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों में इन बैलों के साहस की चर्चा जोरों पर है।


      3. कहानी का नया अंत

      यदि बैल झूरी के घर वापस न लौटते, तो कहानी का अंत कुछ इस प्रकार होता:

      "काँजीहौस से छूटने के बाद हीरा और मोती सीधे झूरी के घर न जाकर जंगल की ओर निकल जाते। वहाँ उन्हें एक बूढ़ा और दयालु किसान मिलता, जो अकेले खेती करता था। वह किसान उन्हें बहुत प्रेम से रखता और उन्हें कभी डंडे से न मारता। हीरा और मोती उस किसान के खेत को लहलहा देते। उधर झूरी, बैलों की याद में उदास रहता और पछताता कि उसने उन्हें गया के साथ क्यों भेजा। कहानी का अंत हमें यह सीख देता कि जहाँ सम्मान और प्रेम मिलता है, वही स्थान घर बन जाता है, चाहे वह पुराना हो या नया।"


      4. चित्रकथा लेखन (संवाद)

      (नोट: पृष्ठ 24 के चित्रों के आधार पर घटनाक्रम)

      • चित्र 1 (बंद करना): मोती: "हीरा, यहाँ तो खाने को मिट्टी भी नसीब नहीं है!"

      • चित्र 2 (योजना): हीरा: "घबराओ मत मोती, हम इस कच्ची दीवार को तोड़ सकते हैं।"

      • चित्र 3 (दीवार तोड़ना): मोती: "एक और धक्का हीरा! देखो, दीवार गिर रही है।"

      • चित्र 4 (आज़ादी): हीरा: "भागो भाइयों! अब हम आज़ाद हैं।"


    • 1. मेरे शब्द (व्याकरण की बात)

      कहानी में आए पाँच नए शब्द, उनके अनुमानित अर्थ और शब्दकोश के अनुसार सही अर्थ:

      शब्दअनुमानित अर्थशब्दकोश के अनुसार अर्थ
      विषादउदासीदुःख, गहरा अफसोस या अवसाद
      पराकाष्ठाआखिरी सीमाअंतिम सीमा या चरम कोटि
      सहिष्णुताबर्दाश्त करनासहनशीलता या क्षमा करने का भाव
      विग्रहअलग होनाअलगाव, बँटवारा या खंड
      अख्तियारअधिकारवश, सामर्थ्य या चयन का अधिकार

      2. भाषा गढ़ते मुहावरे

      दिए गए वाक्यों में मुहावरों को पहचानना और उनसे नए वाक्य बनाना:

      1. दाँतों पसीना आना (कठिन परिश्रम करना)

        • नया वाक्य: पहाड़ पर चढ़ते समय अच्छे-अच्छे पर्वतारोहियों को दाँतों पसीना आ जाता है

      2. दिल काँप उठना (बहुत डर जाना)

        • नया वाक्य: अचानक सड़क पर शेर को सामने देखकर शिकारी का दिल काँप उठा

      3. जल उठना (ईर्ष्या करना)

        • नया वाक्य: पड़ोसी की नई गाड़ी देखकर रमेश जल उठा

      4. ऐंठकर रह जाना (गुस्सा दबाकर रह जाना)

        • नया वाक्य: मालिक की डांट सुनने के बाद नौकर ऐंठकर रह गया

      5. खबर लेना (सजा देना या डांटना)

        • नया वाक्य: आज स्कूल से घर पहुँचने पर पिताजी मेरी खबर लेंगे

      6. गम खा जाना (सहन कर लेना)

        • नया वाक्य: समझदार व्यक्ति छोटी-मोटी बातों पर गम खा जाते हैं

      7. ईंट का जवाब पत्थर से देना (कड़ी प्रतिक्रिया देना)

        • नया वाक्य: भारतीय सेना ने सीमा पर दुश्मनों को ईंट का जवाब पत्थर से दिया

      8. नौ-दो ग्यारह होना (भाग जाना)

        • नया वाक्य: पुलिस की गाड़ी का सायरन सुनते ही चोर नौ-दो ग्यारह हो गया


      3. गतिविधियाँ (संकेत)

      • अभिनंदन-पत्र: "प्रिय हीरा और मोती, आपकी अटूट मित्रता और साहस को हमारा नमन। आपने सिखाया कि आज़ादी के लिए लड़ना कितना जरूरी है।"

      • पशुओं के अधिकार पर भाषण: "साथियों, पशु भी भावनाएँ रखते हैं। उन्हें केवल काम की मशीन न समझें। उन्हें प्रेम, पर्याप्त भोजन और सम्मानजनक जीवन का अधिकार है..."


      4. भाषा संगम (बैल शब्द के पर्यायवाची)

      आपकी पुस्तक के अनुसार 'बैल' को अलग-अलग भाषाओं में क्या कहते हैं:

      • संस्कृत: वृषभः

      • पंजाबी: बल्द

      • मराठी: बैल

      • तमिल: एरिदु

      • कन्नड़: एत्तु

      मातृभाषा में अनुवाद (उदाहरण): "कधी कधी हट्टी बैल सुद्धा पाहायला मिळतो." (मराठी)


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