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Friday, April 17, 2020

कार्य पत्रक नेताजी का चश्मा

अन्य पाठेतर  प्रश्न
कार्य पत्रक

प्रश्न 1. नगरपालिका द्वारा किसकी मूर्ति को कहाँ लगवाने का निर्णय लिया गया?
उत्तर- नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मूर्ति को नगरपालिका द्वारा लगवाने का निर्णय लिया गया। इस मूर्ति को कस्बे के बीचोबीच चौराहे पर लगवाने का फैसला किया गया। ताकि हर आने-जाने वाले की दृष्टि उस पर पड़ सके।
प्रश्न 2. जिस कस्बे में मूर्ति लगवाई जानी थी उसका संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर- जिस कस्बे में नेताजी की मूर्ति लगवाई जानी थी, वह बहुत बड़ा नहीं था। वहाँ कुछ मकान पक्के थे। एक छोटा-सा बाज़ार था। वहीं, लड़के-लड़कियों का एक स्कूल, सीमेंट का एक छोटा कारखाना, दो ओपन एअर सिनेमाघर और नगरपालिका थी।
प्रश्न 3. मूर्ति बनवाने का कार्य स्थानीय ड्राइंग मास्टर को क्यों सौंपना पड़ा?
उत्तर- मूर्ति बनवाने का कार्य स्थानीय ड्राइंग मास्टर को इसलिए सौंपना पड़ा क्योंकि अधिकारी ने फाइलों और मूर्ति संबंधी अन्य बातों के निर्णय में बहुत अधिक समय ले लिया। ये अधिकारी अपना कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही मूर्ति बनवाने का काम कर लेना चाहते थे, इसलिए जल्दबाजी में इसे स्थानीय ड्राइंग मास्टर को सौंप दिया।
प्रश्न 4. नगरपालिका मूर्ति लगवाने में ठोस निर्णय क्यों नहीं ले पा रही थी?
उत्तर- नगरपालिका मूर्ति के संबंध में ठोस निर्णय इसलिए नहीं ले पा रही थी क्योंकि नगरपालिका को अच्छे मूर्तिकारों की जानकारी न थी। उन्होंने पत्र व्यवहार में काफ़ी समय निकाल दिया। उन्हें अपना कार्यकाल समाप्त होने का डर सता रहा था। इसके अलावा उन्हें मूर्ति के लिए उपलब्ध बजट भी कम होता दिख रहा था।
प्रश्न 5.नेताजी की मूर्ति का संक्षिप्त चित्रण कीजिए।
उत्तर- कस्बे की हृदयस्थली के चौराहे पर नेताजी की जो मूर्ति लगाई गई थी वह टोपी की नोक से कोट के दूसरे बटन तक दो फुट ऊँची थी। संगमरमर की बनी इस मूर्ति में नेताजी सुंदर लग रहे थे। उन्हें देखते ही उनके नारे याद आने लगते थे।
प्रश्न 6. नेताजी की मूर्ति में कौन-सी कमी खटकती थी?
उत्तर- नेताजी की मूर्ति सुंदर थी। वह अपने उद्देश्य में सार्थक सिद्ध हो रही थी। उसे देखते ही नेताजी द्वारा किए गए कार्य याद आने लगते थे, परंतु इस मूर्ति में एक कमी जो खटकती थी वह थी-मूर्ति पर चश्मा न होना। चश्मा न होने से नेताजी का व्यक्तित्व अधूरा-सा प्रतीत होता था।
प्रश्न 7. मूर्ति की कमी को कौन और किस तरह पूरा करने का प्रयास करता था?
उत्तर- मूर्ति चश्माविहीन थी। इससे उनका व्यक्तित्व अपूर्ण-सा लगता था। इस कमी को पूरा करने का प्रयास कैप्टन चश्मेवाला करता था। वह नेताजी की मूर्ति पर चश्मा लगा दिया करता था। इस प्रकार वह मूर्ति की कमी औजी के व्यक्तित्व की अपूर्णता को भरने का प्रयास करता था।
प्रश्न 8.कैप्टन कौन था? उसका व्यक्तित्व नाम के विपरीत कैसे था?
उत्तर- कैप्टन फेरी लगाकर चश्मे बेचने वाला एक मरियल और लँगड़ा-सा व्यक्ति था, जो हाथ में संदूकची और एक बाँस में चश्मे के फ्रेम टाँगे घूमा करता था। कैप्टन नाम से लगता था कि वह फ़ौजी या किसी सिपाही जैसा शारीरिक रूप से मजबूत रोबीले चेहरे वाला बलिष्ठ व्यक्ति होगा, पर ऐसा कुछ भी न था।।
प्रश्न 9. कैप्टन मूर्ति के चश्मे को बार-बार क्यों बदल दिया करता था?
उत्तर- कैप्टन देशभक्त तथा शहीदों के प्रति आदरभाव रखने वाला व्यक्ति था। वह नेताजी की चश्माविहीन मूर्ति देखकर दुखी होता था। वह मूर्ति पर चश्मा लगा देता था पर किसी ग्राहक द्वारा वैसा ही चश्मा माँगे जाने पर उतारकर उसे दे देता था और मूर्ति पर दूसरा चश्मा लगा दिया करता था।
प्रश्न 10.‘नेताजी का चश्मा’ पाठ के माध्यम से लेखक ने क्या संदेश देने का प्रयास किया है?
उत्तर- ‘नेताजी का चश्मा’ नामक पाठ के माध्यम से लेखक ने देशवासियों विशेषकर युवा पीढ़ी को राष्ट्र प्रेम एवं देशभक्ति की भावना मजबूत बनाए रखने के साथ-साथ शहीदों का सम्मान करने का भी संदेश दिया है। देशभक्ति का प्रदर्शन देश के सभी नागरिक अपने-अपने ढंग से कार्य-व्यवहार से कर सकते हैं।
प्रश्न 11. हालदार साहब के लिए कैप्टन सहानुभूति का पात्र था? इसे आप कितना उचित समझते हैं?
उत्तर- हालदार साहब जब कैप्टन को फेरी लगाते हुए देखते हैं तो उनके मुँह से अनायास निकल जाता है, तो बेचारे की अपनी दुकान भी नहीं है। वे चश्मेवाले की देशभक्ति के कारण उससे सहानुभूति रखते हैं। उनके इस विचार से मैं पूर्णतया सहमत हूँ क्योंकि कैप्टन जैसा व्यक्ति सहानुभूति का पात्र है।
प्रश्न 12. बच्चों द्वारा मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा क्या प्रदर्शित करता है?
उत्तर- बच्चों

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