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Saturday, April 25, 2020


जागो बंसीवारे ललना!
जागो मोरे प्यारे!
रजनी बीती, भोर भयो है, घर-घर खुले किंवारे|
गोपी दही मातहत, सुनियत है कंगना के झनकारे||
उठो लालजी! भोर भयो है, सुर-नर ठाड़े द्वारे |
ग्वाल-बाल सब करत कुलाहल, जय-जय सबद उचारै ||
माखन-रोटी हाथ मँह लीनी, गउवन के रखवारे|
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, सरण आयाँ को तारै || 
 
१ प्रस्तुत पद में कृष्ण के कौन-से रूप का वर्णन किया गया है?


२ गोपियों की कंगन की झंकार क्यों सुनाई दे रही है?


३ द्वार पर आकर कौन खड़ें हैं?


४ ग्वाल-बालों ने हाथ में क्या ले रखा है?


५ इस पद के अंत में मीरा ने कृष्ण को किस रूप में देखा है?

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